The only home remedy for asthma, cough, or cold in hindi sagarvansi ayurveda

एक औषधि के तीन काम दमा, खांसी या जुकाम / The only home remedy for asthma, cough, or cold in hindi

साधारण दमा रोग (Asthama)        

जब किसी व्यक्ति की सूक्ष्म सांस लेने वाली नली या कोशिकाओं में किसी प्रकार का रोग उत्पन्न होता है तब उस व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत महसूस होने लगती है। जिसकी वजह से उस व्यक्ति को खांसी होने लगती है। इस स्थिति को दमा रोग कहते हैं। दमा रोग की स्थिति में दमा से पीड़ित व्यक्ति को सांस लेने में और छोड़ने में दोनों ही अवस्था में काफी जोर लगाना पड़ता है क्योंकि जब मनुष्य सांस अंदर की ओर लेता है तब उसके फेफड़ों की कोशिकाएं जिससे वायु का बहाव होता है तब उन छोटी-छोटी कोशिकाओं में सिकुड़न या संकुचन जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। जिसकी वजह से फेफड़ों को पूर्ण ली हुई सांस नहीं पहुंच पाती और इसी संकुचन की वजह से आधी बची सांस जो फेफड़ों तक नहीं पहुंच पाती उसे वापस बाहर छोड़ना पड़ता है। यही अवस्था दमा की परेशानी कहलाती है। यह रोग तब अधिक बिगड़ जाता है जब रोगी सांस को अंदर की ओर लेता है परंतु कठिनाई के चलते पीड़ित से सांस अंदर नहीं ली जाती। दमा के रोग में जब पीड़ित सांस लेता है तब सीटी बजने की हल्की - हल्की सी आवाज आती है। दमा की समस्या में जब रोग अधिक बढ़ जाता है तब दमा रोग में दौरे - पड़ने लगते हैं इस अवस्था में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है जिससे पीड़ित को बहुत अधिक दिक्कत होती है। सांस ठीक से ना ले पाने की वजह से पीड़ित छटपटाने लगता है और जब दोरा अधिक उग्र होता है तो पीड़ित के शरीर में ऑक्सीजन की कमी की वजह से दिक्कत बहुत बढ़ जाती है और ऐसी अवस्था में पीड़ित का चेहरा सांस की कमी से नीला पड़ जाता है और इस दौरे में पीड़ित को जोर जोर से खांसी उठती है परंतु पीड़ित के तमाम प्रयासों व कोशिश के बाद भी बलगम नहीं निकलता।

              

दमा होने के कारण

 

1. दवइयों या औषधियों का अधिक प्रयोग या सेवन करने के कारण कफ सूख जाता है और कफ के सूख जाने से दमा रोग उत्पन्न हो जाता है।

2.  आज के समय का गलत खानपान की वजह से भी दमा रोग उत्पन्न हो सकता है। 3.  मानसिक तनाव, अधिक क्रोध के कारण भी दमा रोग उत्पन्न हो जाता है।

4.  नशीले पदार्थों का अधिक सेवन करना भी दमा रोग का मुख्य कारण है। नजला, जुखाम, खांसी जैसे रोगों का अधिक समय तक बने रहने से दमा रोग हो जाता है।

5. नजला रोग होने के दोरान संभोग क्रिया करने से दमा रोग उत्पन्न होता है।

6. अधिक मिर्च मसाले या तले-भुने खाने की वस्तुएं अथवा गरिष्ठ भोजन करना भी दमा रोग की उत्पत्ति का कारण बनता है।

7.  भूख से अधिक भोजन करना भी एक कारण हो सकता है।

8.  मनुष्य की सांस की नली में सांस के द्वारा धूल चली जाने से या ठंड लगने के कारण भी दमा रोग हो सकता है।

9.  फेफड़ों में कमजोरी, हृदय की कमजोरी, आँतों में कमजोरी, स्नायुमंडल में कमजोरी तथा गुर्दे की कमजोरी की वजह से भी दमा रोग होता है।

10.  धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों को दमा रोग होने का अत्यधिक खतरा रहता है।

उपचार

मुलेठी और सुहागा का फूला दोनों को अलग-अलग कूटकर बारीक चूर्ण बना लें और कपड़े से छान कर मैदे जैसा बारीक चूर्ण हो जाने पर दोनों औषधियों को समान मात्रा में मिलाकर किसी कांच की शीशी में भरकर रख लें। बस इतना ही करना है और खांसी की दवा, जुकाम की दवा, सांस की सफल दवा तैयार है।

सेवन करने की विधि या तरीका आधा से 1 ग्राम की मात्रा में दिन में दो या तीन बार शहद से चाटें यदि शहद उपलब्ध ना हो सके तो औषधि का सेवन गर्म पानी से भी कर सकते हैं । बच्चों के लिए इस औषधि का 1/ 8 ग्राम यानी  लगभग एक रत्ती की मात्रा में या कहें कि बच्चे की उम्र के अनुसार थोड़ी अधिक मात्रा में दे सकते हैं।

परहेज :-  दही, चावल, केला व ठन्डे पदार्थों का सेवन से बचें और हो सके तो इनका उपयोग न करें।

विशेष 1. उपरोक्त औषधि से पेट, गला, नाक, इसके अलावा और भी कई प्रकार के साधारण व जटिल रोगों में भी यह औषधि चमत्कारिक रूप से लाभ करती है और रोगों का नाश करती है। इस औषधि ने एक नहीं बल्कि अनेक रोगों में लाभ दिलाया है जैसे खांसी, जुखाम, सांस, कफ, स्वर - भेद, कुक्कुर खांसी एवं कई प्रकार के संक्रमण के रोगियों की सफल चिकित्सा इस औषधि से की जा सकी है।

2.  हाल ही का जुखाम यानी की ताजा जुखाम में उपरोक्त औषधि की चुटकी भर मात्रा में दवा को एक घूंट गर्म पानी में मिलाकर दिन में दो - तीन बार के सेवन से एक से दो दिन तक लेते रहने से जुखाम समाप्त हो जाता है।

3. सभी प्रकार की खांसी जैसे कठिन खांसी, क्रूप खांसी, काली खांसी, जीर्ण खांसी इत्यादि मैं इस औषधि को शहद के साथ लेना उत्तम रहता है।

4. यह औषधि ऐसे सांस के रोगियों के लिए अधिक लाभदायक है जिनको अधिक बलगम (गाड़ा गाड़ा) आता है और बलगम की वजह से पीड़ित को जोर जोर से खांसना पड़ता है जिससे बलगम बाहर निकल जाए और जब तक के बलगम बाहर ना निकल आए तब तक पीड़ित को आराम नहीं मिलता ऐसी समस्या के रोगी को यह दवा शहद या मिश्री की चाशनी या सिर्फ कत्था लगा हुआ पान के साथ सेवन करना अधिक उचित और लाभदायक रहता है। रात्रि में सोते समय साधारण से दोगुनी मात्रा में लेने से सांस के रोगी को रात्रि में कष्ट कम होता है और इस औषधि के द्वारा बलगम पखाने के रास्ते से निकल जाता है।