oldest back and knee pain will be cured by this Ayurvedic treatment sagarvansi ayurveda

घुटने व कमर के दर्द को कहें बाय-बाय इस रामबाण औषधि से / oldest back and knee pain will be cured by this Ayurvedic treatment

कमर घुटनों के दर्द की रामबाण औषधि

उम्र बढ़ने के साथ-साथ मानव शरीर में कई प्रकार की तकलीफ होने लगती है। वृद्धावस्था में मनुष्य एक तरीके से बीमारियों का केंद्र हो जाता है। जिनमें कई तरह की बीमारियां और कई प्रकार के दर्द भी शामिल हैं। बीमारियां जैसे डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हृदय संबंधित समस्या, श्वास रोग इत्यादि और दर्द जैसे घुटनों टकनों के दर्द की समस्या, कमर एवं पीठ दर्द की समस्या इत्यादि। आजकल के दौर में यह समस्या होना एक आम बात है। उपरोक्त समस्या या बीमारियों के उपचार और बीमारियों में पथ्य अपथ्य समस्या की चर्चा अपने पूर्व आर्टिकल में कर चुके हैं। आज हम कमर एवं घुटनों के दर्द की औषधि की चर्चा करेंगे।

 

घुटनों एवं कमर दर्द

घुटनों का दर्द वृद्धावस्था में घुटनों एवं कमर दर्द का होना आम बात है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ शरीर के ऊतक कमजोर होने लगते हैं और साथ ही मानव शरीर के जोड़ (जॉइंट्स) घिसने भी लगते हैं जिससे उस स्थान पर अत्यंत असहनीय दर्द होता है और चलने फिरने में असमर्थता बढ़ जाती है। मानव शरीर में सबसे ज्यादा मुख्य दो स्थान ऐसे हैं अगर उन स्थानों में दर्द बढ़ जाए तो चलने फिरने में असमर्थता हो जाती है। ऐसे दो स्थानों का नाम है कमर और  घुटनों का दर्द आज हम आपको इन दोनों स्थानों के दर्द से आराम पाने का तरीका बताने जा रहे हैं।

                          

 कमर दर्द का उपचार       

खसखस 25 ग्राम, खड़ा धनिया 25 ग्राम (धनिया के दाने),  गेहूं के दाने लगभग 50 ग्राम (गेहूं के दाने रात को भिगोए हुएे) मिलाकर पीस लें और चटनी बना लें इस चटनी को गाय के दूध यदि गाय का दूध ना मिले तो जो उपलब्ध हो  उस दूध में उपरोक्त चटनी को अच्छे से पकाकर इसकी खीर बना लें और आवश्यकतानुसार इस खीर का सेवन करने से दर्द में आश्चर्यचकित लाभ मिलता है। उपरोक्त बताई गई औषधि से कई अन्य लाभ भी मिलते हैं जैसे ताकत बढ़ती है, पाचन शक्ति की कमजोरी भी नष्ट होती है।

 

सहायक उपचार

1. कमर दर्द में तारपीन के तेल की मालिश अत्यंत लाभप्रद है।

2. मैदा, चावल, चिकनाई (तली हुई चीजों का सेवन) और उड़द की दाल जैसी चीजों से परहेज करना अनिवार्य है।

 3. सादा पानी के स्थान पर हमेशा गुनगुने पानी का सेवन करें यदि गुनगुना पानी  ना पी सकं तो पानी में तुलसी या छोटी इलायची को पीसकर डाल दें और सुबह का उबला हुआ पानी शाम को और शाम का उबला हुआ पानी सुबह तक सेवन करें।

 4.  सुबह खाली पेट 3-4 अखरोट की गिरी अच्छी तरह खूब चबा-चबाकर खाने से कमर घुटनों और गठिया के दर्द में वहुत लाभ मिलता है। इससे मस्तिष्क की ताकत बढ़ती है और रक्त भी शुध्द होता है।

 

घुटनों का दर्द

प्रातः काल मैं मेथी दाने का बारीक चूर्ण दो छोटी चाय की चम्मच भर की मात्रा में सादा पानी के साथ पहुंचने से फाकने से घुटनों का दर्द समाप्त होता है। खासकर बुढ़ापे में घुटनो में होने वाले दर्द के लिए अधिक लाभकारी है। घुटनों के दर्द में मेथी दाने की चाय या काढ़ा भी अधिक लाभकारी है। मेथी दाने की चाय बनाने की विधि एक से डेढ़ चम्मच मेथी दाना (लगभग 5 ग्राम) दर्दरा कुटा हुआ (मोटा कूटा हुआ) को 200 m.l. पानी में डालकर धीमी आंच पर रख दें। लगभग 10 से 15 मिनट उबालने के बाद जब पानी 150 m.l. के आसपास रह जाए तब आंच पर रखे बर्तन को उतार कर रख लें और जब पीने लायक गर्म रह जाए तब उसे छानकर चाय की तरह एक-एक घूंट करके पी लें

 

विशेष

1. सुबह खाली पेट 2-3 अखरोट की गिरीयाँ खाने से चमत्कारी असर मालूम पड़ता है। अखरोट खाने से मस्तिष्क भी शक्तिवान एवं परिपूर्ण होता है।

2. नारियल की गिरी अक्सर खाते रहने से घुटनों के दर्द की संभावना नहीं रहती।

 

दर्द में लगाने के लिए लाल तेल

सामग्री : 250 ग्राम सरसों का तेल, 100 ग्राम तारपीन का तेल, 50 ग्राम लहसुन की कली, 20 ग्राम रतनजोत, पुदीना सत्व 10 ग्राम, अजवाइन का सत्व 10 ग्राम, कपूर देसी 10 ग्राम।

 तेल बनाने की विधि : एक साफ शीशी में पुदीना सत्व डाल दें अब अजवायन सत्व और कपूर को पीसकर पुदीना सत्व की शीशी में डालकर हिलाकर मिला दें। थोड़ी देर में यह तीनों वस्तु मिलकर द्रव्य रूप मैं हो जाएंगी इसे "अमृतधारा" भी कहते हैं। सरसों का तेल किसी बर्तन में डालकर गर्म कर लें जब तेल गर्म हो जाए तब आंच से नीचे उतार कर रख लें अब लहसुन की कलियां छीलकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर सरसों के तेल को थोड़ा ठंडा होने पर लहसुन के टुकड़ों को तेल में डाल दें और सरसों के तेल को फिर से तेज आंच पर रख दें। तेल को इतना पकाएं लहसुन की कलियां जलकर काली पड़ जाएं जैसे ही कलियाँ काली हो जाए तब तेल के बर्तन को आंच पर से नीचे उतार कर उसी गरम तेल में रतनजोत डाल दें इससे तेल का रंग लाल हो जाएगा तेल के ठंडा होने पर कपड़े से छान कर किसी बोतल में भर लें पकाए हुए तेल में अमृतधारा और तारपीन का तेल मिलाकर अच्छी तरह हिला दें। तेल तैयार है।