Ayurvedic treatment of nasal rupture or repeated nose bleeding in hindi sagarvansi ayurveda

नकसीर फूट जाना या बार - बार नाक से खून निकलने का आयुर्वेदिक इलाज / Ayurvedic treatment of nasal rupture or repeated nose bleeding in hindi

नाक से खून निकलने का आयुर्वेदिक उपचार ( नकसीर फूटना) Nasal Bleeding

नकसीर फूटने का अर्थ है नाक की नसों से निकलते हुए नाक के नथुनों से रक्त का स्त्राव होना एसी अवस्था को ही नकसीर फूटना कहते हे। नाक से रक्त स्त्राव होने की वजह है नाक के अंदरूनी कोमल रक्त कोशिकाओं का किन्ही कारणों से फट जाना जिसकी वजह से नाक से रक्त स्त्राव होने लगता है। नकसीर फूटने के कुछ कारण निम्नलिखित हैं

 1.  शरीर में आवश्यकता से अधिक गर्मी उत्पन्न होना या मौसम के अनुसार शरीर में उत्पन्न गर्मी के कारण नकसीर फूटने का खतरा रहता है।

2.  दिमाग या नाक के किसी हिस्से में चोट लगने की वजह भी नकसीर फूटने का कारण बन सकती है।

3.  शरीर में बिगड़े जुकाम के कारण भी नकसीर फूटने का डर बना रहता है।

4.  किसी - किसी व्यक्ति को अत्यधिक गर्म खाने की वस्तुओं का सेवन करने से भी नकसीर फूटने की दिक्कत रहती है। आमतौर पर देखा जाए तो नकसीर फूटना रोग नहीं है परंतु बार - बार नाक से रक्त स्त्राव होना एक रोग बन जाता है क्योंकि यह रोग कभी भी और कहीं भी शुरू हो जाता है और इस समस्या में रक्त का स्त्राव होने की वजह से शरीर में अधिक कमजोरी, आलस्य, थकान और शरीर में रक्त के प्रवाह से रक्त की कमी जैसी परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है। नाक से रक्त स्त्राव के बाद कुछ ही देर में रक्तस्राव बंद हो जाता है परंतु नाक से रक्त स्त्राव के दौरान कभी-कभी रक्त नाक के रास्ते बाहर आने की जगह मुंह मैं चला जाता है। इस स्थिति मैं रक्त के मुंह में प्रवेश करने से पीड़ित की श्वास नली में रुकावट होने से इसकी स्थिति गंभीर हो जाती है।

नकसीर शुरू होने से पहले के लक्षण

1.  नकसीर फूटने से पहले सिर घूमने लगता है। कभी कभी तेज चक्कर भी महसूस होते हैं।

2.  नकसीर की शुरूआत से पहले मस्तिष्क में भारीपन महसूस होता है।

3.  मस्तिष्क में भारीपन तो रहता ही है इसके अतिरिक्त सिर में दर्द का अनुभव होता है जो एक मुख्य लक्षण है।

4.  नकसीर की शुरूआत से चेहरा लाल होने का लक्षण दिखाई देता है जो नकसीर फूटने के तुरंत बाद सही हो जाता है।

                  

नकसीर तुरंत बंद करने के लिए उपाय

1. सुहागा थोड़ी मात्रा में (जितना नाक के नथुने मैं पर्याप्त हो जाए) लेकर पानी में घोलकर दोनों नाक के   नथुनो पर लगा ले इस प्रक्रीया से नकसीर तुरंत बंद हो जाएगी।

2. जैसे ही किसी व्यक्ती की नकसीर शुरू हो तब देर न करते हुए तुरन्त रोगी को बिठाकर सिर पर धार बनाकर ठंडा पानी डालकर सिर को भिगो दें और तुरंत बाद पीली मिट्टी को पानी में भिगोकर नाक के पास लगाकर उसकी खुशबू सूंघने से नकसीर बंद हो जाएगी। इसके साथ ही डॉक्टर से संपर्क करने जरा भी विलम्भ न करें।

3. नकसीर शुरू होने के समय रोगी को नाक की जगह मुंह से सांस लेना उचित रहता है।

4. रोग के शुरू होने पर रोगी के दोनों हाथ में बर्फ के टुकड़े रख देने चाहिए और रोगी को ठंडक वाली जगह पर बैठाना चाहिए अथवा बर्फ को कपडे में लपेट कर सिर के नीचे की तरफ रखना चाहिए।

 

आयुर्वेदिक उपचार

1. कामदुधा रस मौक्तिक युक्त दो रत्ती कर घृत मिले आंवले चूर्ण के साथ नित्य दो बार दें।

2. फिटकरी भस्म 2 से 4 रत्ती की मात्रा में मिश्री के साथ या मिश्री के शरबत के साथ नित्य सुबह शाम दिया जाए तो नकसीर एवं रक्तप्रदर भी ठीक हो जाता है।

3. चंदनादि अर्क 2 से 4 तोला दूध की लस्सी के साथ मिश्री मिलाकर सुबह व शाम सेवन करने से नकसीर या पेशाब के साथ होने वाले रक्त स्त्राव में अधिक लाभ मिलता है। चंदनादि अर्क  के आभाव में चंदन का अर्क  लिया जा सकता है।

4.  वसंत कुसुमाकर रस एक गोली सुबह व 1 गोली श्याम के समय वासा रस और शहद के साथ दें। यह नकसीर की बहूप्रशंसित औषधि है और नकसीर की औषधि के रूप में जानी जाती है। जो व्यक्ति थोड़ा भी गर्म खा लें या  जिनको धूप मैं निकलने से ही नाक से रक्त स्त्राव शुरू हो जाता है उन व्यक्तियों के लिए यह दवा अत्यंत लाभकारी है।