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छाती का दर्द तथा पसली चलने की समस्या का घरेलू उपाय / pasli chalna ya pasli me dard ka gharelu upchar home remedy for chest pain

छाती में दर्द तथा पसली चलना (Chest pain / Pasli Chalna)

छाती या पसली में दर्द होने के कुछ निम्नलिखित कारण हो सकते हैं जैसे चोट लगना, फेफड़ों की नसों में खिंचाव या जकड़न इत्यादि। आज यहां हम छाती में दर्द होने की या पसली चलने की समस्या के बारे में बात कर रहे हैं। मानव शरीर के फेफड़ों में कफ जम जाने से छाती की नसें जकड़ जाती है। यही कारण होता है जिसकी वजह से मानव को छाती या पसलियों में दर्द का अनुभव होता है और इस स्थिति में ही पसली चलने की समस्या भी सामने आती हैं। पसली चलने के रोग के चलते बच्चों की नाक बहने लगती है, छींकें आती है, छाती में से कफ की आवाज आती है तथा सांस जोर जोर से चलने लगती है। मानव शरीर के फेफड़ों में कफ जम जाने का कारण है ठंड लगना कभी-कभी जब व्यक्ति को ठंड लग जाती हैं या कहें की मानव शरीर में ठंडक बैठ जाती है तब कफ ऊपर की तरफ यानी छाती की तरफ या उस क्षेत्र में जम जाता है या रुक जाता है और उस अवस्था में कफ बाहर निकलने में असमर्थ या सामर्थहीन हो जाता है। यह रोग ऐसे व्यक्तियों को भी हो जाता है जो ऐसे भोज्य पदार्थों का अधिक सेवन करते हैं जिससे शरीर में गैस पैदा होती है। यह रोग ठंडा मौसम या ठंडी चीजों के सेवन से भी उत्पन्न होता है। पसली चलने का रोग छोटे बच्चों में सबसे ज्यादा देखा जाता है। देखा जाए तो कुछ रोग की शुरुआत बचपन में मां के द्वारा प्राकृतिक पोषण ना मिल पाने के कारण होती हैं। नवजात बच्चों का स्वास्थ्य उनकी माता के भोजन पर निर्भर करता है किसी कारण से यदि बच्चे की माता रोगी है तो इस बात की संभावना अधिक हो जाती है कि उसका बच्चा भी बीमार होता रहेगा। इस समस्या का सीधा सा कारण है कि नवजात बच्चा मां के दूध का ही सेवन करता है इसी कारण से बच्चों को किसी प्रकार का रोग होने पर बच्चों के साथ - साथ उसकी मां का उपचार करना भी आवश्यक होता है। छोटे बच्चों को बचपन में कई रोग होते हैं जिनमें से एक है पसली चलना और छाती की नसों में जकड़न के कारण से छाती में दर्द होता है। एक बार इस रोग के होने पर यह रोग बार बार उत्पन्न होने लगता है और सही समय पर सही उपचार न करने के कारण यह निमोनिया का रूप ले लेता है जो की बहुत खतरनाक स्थिति हो जाती है।

 

छाती में दर्द तथा पसली चलना (Chest pain / Pasli Chalna) का

उपचार

एक चम्मच अजवाइन को 250 ग्राम पानी में उबाल लें एक चौथाई शेष रह जाने पर तैयार काढे को छानकर रात को सोने से पहले गरम गरम ( सहनशक्ति अनुसार) सेवन कर किसी कपड़े से पूरे तन को  ढाक कर या ओढ़ कर सो जाएं। दिन में दो बार नियमित पीने से 5 से 7 दिन में छाती का दर्द नष्ट हो जाता है। वह काढा दो चम्मच की मात्रा से दिन में दो - तीन बार निरंतर कुछ दिन देने से पसली चलना भी ठीक हो जाता है।

 

शिशु को सर्दी लगना 6 महीने से 12 महीने के आयु वाले छोटे बच्चों को ठंड के मौसम में या ठंडी हवा के कारण सर्दी लग जाए, छाती में कफ बोले, छाती में दर्द हो या पसली चले तो आधा कप पानी में 10 - 12 अजवाइन के दाने उबालकर आधा रह जाने पर इसे साफ कपड़े से छानकर तैयार अजवाइन के काढे को थोड़ा गर्म - गर्म शिशु को दिन में दो बार अथवा केवल रात में सोने से पहले पिलाएं आशातीत लाभ मिलेगा।

 

विशेष साथ ही यह अजवाइन का काढ़ा तिल्ली, यकृत, वमन, जी मिचलाना, हिचकी, खट्टी डकार, पेट की गुड़गुड़ाहट एवं पथरी रोगों का विनाशक है। इससे मौसम बदलते ही होने वाले जुकाम की शिकायत भी दूर हो जाती है। ध्यान रहे जिन्हें मूत्र कठिनाई से उतरता हो वह इस काढ़े का सेवन ना करें।

 

विकल्प लौंग के इस्तेमाल से शरीर के अंदर की वायु नलियों का संकोच तथा विकास और उससे होने वाली पीड़ा नष्ट होती है। मुंह में लौंग रख कर चूसने से खाँसी का दौरा कम हो जाता है कफ आराम से निकलता है खाँसी, श्वास तथा दमा के रोगों में लौंग के सेवन से लाभ होता है।

बच्चों की पसली चलने पर दूध में पांच - सात तुलसी की पत्तियां और एक लौंग को उबालकर बच्चों को पिलाने से पसली चलना बंद हो जाती है।

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