The successful proven treatment of Pneumonia, Poar pimples, Mouth ulcers and Diarrhoea sagarvansi ayurveda

छोटे बच्चों मैं निमोनिया, फोड़े फुंसी, मुंह में घाव तथा दस्त व मरोड़ का सफल सिद्ध उपचार / The successful proven treatment of Pneumonia, Poar pimples, Mouth ulcers and Diarrhoea

बच्चों की बीमारियां

छोटे बच्चे सभी को प्यारे होते हैं। और हो भी क्यों ना वह होते भी इतने मासूम और प्यारे है छोटे बच्चों को देखते ही इंसान क्रोध, आवेश दिन भर की थकान आदि सब भूल जाता है। बच्चों को वैसे भी भगवान का रूप माना जाता है ऐसे में यदि बच्चे किसी प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हो जाएं तो फिर कहना ही क्या ऐसे समय में सभी बच्चों के माता-पिता का किसी भी कार्य में मन नहीं लगता जब तक की छोटे - छोटे प्यारे बच्चों का स्वास्थ्य पहले जैसे ठीक नहीं हो जाता। आज ऐसी ही कुछ छोटी - मोटी समस्या जो बच्चों को अक्सर हो जाती है और उन बच्चों के माता-पिता की नींद चैन सब उड़ा देती है। ऐसी कुछ समस्या जिनके उपचार के बारे में आज हम आपको बताने वाले हैं बालकों के यानी कि बच्चों के लिए इधर कुछ ऐसी स्वदेशी दवाइयों के नुस्खे बताने वाले हैं जिनका बिना डरे या निर्भय रूप से बच्चों की बीमारियां, बिगड़े स्वास्थ्य में प्रयोग करने से निश्चित रूप से लाभ मिलता है। यह औषधि तब काम आती हैं जहां डॉक्टर और वैध का आभाव हो। उस समय ना मिल सके तब इन नुस्खों की मदद से काम होता है और जल्दी आराम होता है। साधारण रोगों पर भी यह दवाई बहुत अच्छा काम करती हैं और इसी कारण से यह नुस्खे डॉक्टर और वैध की आवश्यकता को कम कर देते हैं। बताई जाने वाली औषधियों से जल्दी से आराम मिलता है और ऐसी जगहों पर ऐसे नुस्खे की जानकारी अति आवश्यक होती है। जहाँ तुरन्त डॉक्टर या वैध उपलब्ध ना हो सकें ऐसे नुस्खों की जानकारी रखने से आप रोग को बड़ी आसानी से काबू कर सकते हैं और पैसे बचाने में मैं भी ऐसे नुस्खे काम आते हैं। देसी दवाइयों या नुस्खों की जानकारी बहुत लाभदायक होती है। परंतु इस बात का विशेष ध्यान दें की देसी दवा को बनाने में आवश्यक सामग्री को देशी दवा बेचने वालों के यहां से व पंसारियों के यहां से एक दम असली सामग्री ही लेनी चाहिए।

 

उपचार

1. बच्चों की पसली चलना या डब्बारोग (ब्राँको न्यूमोनिया)

निमोनिया में फुलाया हुआ सुहागा छः रत्ती की मात्रा में गुनगुने पानी के साथ रोग की प्रबलता को देखते हुए या रोग की स्थिती के हिसाब से बार-बार देते रहने से भयंकर व कठिन स्थिति में पहुंचा हुआ रोग भी मिट जाता है। यह औषधि एकदम साधारण है परंतु बहुत अधिक लाभकारी है।

 

2. फोड़े फुंसी तथा खाज के लिए मरहम

असली देसी घी 10 तोला की मात्रा में, जिंक ऑक्साइड 2 तोला, संगेजराहत 2 तोला, बोरिक एसिड 2 तोला, कपूर एकदम बारीक या महीन पिसा हुआ आधा तोला, हाइड्रोजरी ऑक्साइड - रुबरी छः आना की मात्रा में इन सभी सामग्रियों को कपड़े से छान कर  असली देसी घी में  मिलाकर मरहम बना लें और नीम की पत्तियों को उबालकर उस पानी से घाव को अच्छी तरह से धोकर साफ कर लें फिर इस मरहम को घाव की जगह लगा लें।

 

3. गर्मी के कारण बच्चों के मुंह में घाव हो जाने पर

ग्लिसरीन 4 तोला, टैनिक एसिड एक तोला दोनों को कूटकर एकरस हो जाने तक मिलाएं। एकरस हो जाने के बाद साफ शीशी में भर लें और रुई के फाहे से पीड़ित बच्चे के मुंह में लगाकर उसको गोद में उल्टा लिटा लें इस प्रक्रिया से मुंह में बन रही लार  बाहर गिर जाएगी। इस प्रक्रिया को दो-तीन दिन तक दोहराने से बच्चों को इस समस्या में आराम मिल जाएगा। यदि किसी कारण से दवा पेट में भी चली जाए तो भी कोई हानी या नुकसान नहीं होगा।

 

4. (a) बच्चों के पेट में दस्त व मरोड़

तज 1 तोला, जायफल 3 तोला, लौंग एक तोला, इलायची एक तोला, चीनी 25 तोला, खड़िया मिट्टी 11 तोला इन सभी सामग्रियों को बारीक व महीन कूटकर कपड़े से छान कर एक साफ शीशी में भर लें। इस मिश्रण को 3 से 30 रत्ती तक की मात्रा में आवश्यकता व अवस्था के अनुसार पानी के साथ दिन में, दोपहर में, व रात में (तीन बार) दें।

(b) चूने का पानी कली का चूना 4 तोला, चीनी 8 तोला, साफ पीने का पानी 60 तोला की मात्रा में मिलाकर रख लें जब चीनी मिश्रण में पूर्ण रूप से मिल जाए और चूना नीचे बैठ जाए तब ऊपर से निथरा हुआ पानी अलग शीशी में निकाल लें। मात्रा 3 महीने के बच्चे को 5 से 10 बूंद, 1 वर्ष तक के बालक को 20 से 25 बूंद दूध या जल के साथ मिलाकर दें। इस नुस्खे से चाहे जैसी भी उल्टी हो उसमें अति शीघ्र लाभ मिलेगा। दूध पचने लगता है। पेट दर्द और कब्ज भी दूर हो जाती है।