Ayurvedic treatment for Apathy, Laziness, Lethargy by Depression in hindi sagarvansi ayurveda

डिप्रेशन द्वारा उदासीनता, आलस्य, सुस्ती का आयुर्वेदिक उपचार / Ayurvedic treatment for Apathy, Laziness, Lethargy by Depression in hindi

डिप्रेशन के चलते सुस्ती आलस्य और उदासीनता का उपचार

 

डिप्रेशन को हिंदी में अवसाद कहते हैं। डिप्रेशन एक ऐसी समस्या का नाम है जिसमें पीड़ित मनुष्य चाहे वह स्त्री हो या पुरुष हर समय दुखी, गुमसुम, चुपचाप, अकेला समाज से कटा कटा रहता है। जिसकी एक या एक से अधिक वजह भी हो सकती हैं। डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्या के चलते पीड़ित में उदासीनता, आलस्य, सुस्ती जैसी और भी बुरी आदतें शरीर में प्रवेश कर पीड़ित के शरीर को बीमारियों का केंद्र बना देती है। पीड़ित ऐसी अवस्था में दुखी रहना, हर बात पर खुद को छोटा महसूस करना, दैनिक गतिविधियों में अरुचि जैसी समस्या भी देखने को मिलती हैं। यदि दुखी रहना, छोटा महसूस करना और दैनिक या रोजमर्रा के कार्यों के प्रति अरुचि जैसी परेशानी अधिक समय तक किसी व्यक्ति के साथ बनी रहना ही डिप्रेशन जैसी समस्या की उतपत्ती के लक्षण है या कहै की इसी अवस्था को डिप्रेशन कहा जाता है। डिप्रेशन या अवसाद की समस्या एक बहुत ही जटिल बीमारी है। यह बीमारी एक तरह से मानसिक रोग है जिसमें इस से पीड़ित व्यक्ति को हमेशा उदासी या किसी भी चीज के लिए किसी भी प्रकार का कोई लगाव ना रहना, हर समय दुखी रहना, खुद को सबसे नीचा समझना इत्यादि। ऐसी कुछ दिक्कतें डिप्रेशन की समस्या से जूझ रहे व्यक्ती में देखने को मिलती हैं।अधिकतर लोग डिप्रेशन का शिकार तब होते हैं जब वह किसी लक्ष्य या किसी चीज को पाने की कोशिश काफी लंबे समय से कर रहे हो परंतु हर बार उनके हाथ सिर्फ नाकामयाबी के सिवा कुछ नहीं लगता ऐसे व्यक्ति धीरे-धीरे अवसाद या डिप्रेशन की ओर अग्रसर होते हैं और बढ़ते-बढ़ते डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। डिप्रेशन की समस्या में पीड़ित खुद से इतना चिढ़ने लगता है कि वह एक समय खुद की जान लेने तक के विचारों को ले आता है और कोई कोई तो ऐसे विचारों पर अमल करने की कोशिश भी करते है। देखा जाए तो आज के आधुनिक युग में यह समस्या काफी आम हो गई है। अवसाद प्रकरण का आमतौर पर औसत समय 6 से 8 महीने का होता है।

 

अवसाद होने का वास्तविक उदाहरण

हाल ही में कुछ समय पहले रसिया के एक युवक ने एक ऐसा गेम बनाया था जिसमें उस गेम को खेलने वाले व्यक्ति को या प्लेयर को अंत में अपने जीवन का त्याग करने पर विवश कर दिया जाता था उस गेम का नाम 'ब्लू व्हेल' रखा गया था इस गेम में गेम की खोज करने वाले या उस गेम को बनाने वाले व्यक्ति गेम को खेलने वाले प्लेयर को हर दिन कुछ ना कुछ चैलेंज देते थे। जिसे उसको पूरा करना पड़ता था जिससे वह अगले लेवल पर पहुंच जाता था ऐसा करने के साथ-साथ वह उस व्यक्ति  धीरे - धीरे समाज से व अन्य दैनिक कार्यों से अलग रखता था जोकि अवसाद होने के ही प्रमुख लक्षण हैं। इस गेम के साथ ही वह डिप्रेशन जैसी परेशानी का शिकार हो जाते थे और  अंततः उस गेम को खेलने वाले व्यक्ति को अपने जीवन त्याग करने में जरा भी हिचकिचाहट नहीं होती थी और वह अवसाद के चलते अपना जीवन त्याग कर देते थे। हमारा आप सभी लोगों से निवेदन है कि इस तरह के असामाजिक तत्वों द्वारा बनाए गये व्यर्थ के खेलों पर अपना समय बर्बाद ना करें। उपरोक्त सभी केवल आपको समझाने के लिए लिखा गया है कि अवसाद की स्थिति कितनी खतरनाक व भयानक होती है।

 

अवसाद के कारण

1. यह अनुवांशिक या वंशानुगत समस्या के कारण हो सकती है जैसे समस्या पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही हो।

2. मानव शरीर की हारमोनल परिवर्तन के चलते यह समस्या उत्पन्न हो सकती है।

3.  किसी व्यक्ती के जीवन में अचानक बहुत बड़े परिवर्तन के चलते व्यक्ती इस समस्या का शिकार हो सकता है।

4.  दिमाग में हुआ परिवर्तन (दिमागी रोग) के कारण भी अवसाद या डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं।

5.  डिप्रेशन का एक कारण मौसम में लगातार हो रहे परिवर्तन भी हो सकता है।

 

उपचार

1. अग्नितुंडी बटी (रस) एक से दो गोली गर्म पानी के साथ सुबह और शाम सेवन करने से सभी शिथिलता संबंधी कष्ट दूर होते हैं। उदासीनता, सुस्ती आदि दूर होती है। हृदय एवं स्नायु तंत्र वाहिनी संस्थान की कार्य क्षमता में वृद्धि होती है। परन्तु इसका सेवन लगातार अधिक दिनों तक नहीं करना चाहिए।

2. चौसठ प्रहरी पीपल 2 से 4 रत्ती की मात्रा में सुबह और शाम को शहद के साथ देने से अल्प निद्रा, सुस्ती आदि में लाभ होता है।

3. दशमूल काढ़ा लगभग 4 तोला की मात्रा में रोजाना 2 - 3 वार देने से सुस्ती, सिरदर्द, पसली का दर्द आदि रोग में लाभ होता है। इससे अनेक तरह के वात रोग एवं प्रसवोपरांत के अनेक कष्टों में भी यह लाभदायक है।

4.  अश्वगंधारिष्ट एवं द्राक्षारिष्ठ प्रत्येक 2 तोला लेकर उतनी ही मात्रा में पानी मिलाकर भोजन के बाद सुबह शाम सेवन करने से सभी तरह के मानसिक और शारीरिक सुस्ती दूर होती है।

5. नवरत्न कल्पामृत रस एक से दो गोली सुबह शाम दूध के साथ सेवन करने से शरीर में ओज की वृद्धि होती है और सुस्ती का नाश होता है।

6.  यदि रक्त की कमी से सुस्ती या अालस्य हो तो हमारे इस वेबसाइट के मैं आपको रक्त बढ़ाने का उपचार भी उपलब्ध है कृपया उसे पढ़कर लाभ उठाएं।

 

उपरोक्त सभी उपचार किसी अच्छे प्रशिक्षित आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही करें