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मधुमेह बचाव के अचूक उपाय और मधुमेह के साथ आसान जीवन / diabetes ka desi anokha gharelu upchaar Easy to live with diabetes

आजकल हमारी जीवनशैली ऐसी हो गई है, जिससे उच्च रक्तचाप एवं मधुमेह के रोगी बढ़ते जा रहे हैं मधुमेह से बचाव किया जा सकता है। इसी दृष्टि से यहां मधुमेह उत्पन्न करने वाले कारण, लक्षण, और उसके कुछ उपचार आदि दिए जा रहे हैं--

कारण-- मधुमेह का पैतृकता, मोटापा, उच्च रक्तचाप, हार्ट अटैक, आयु, तनाव तथा श्रम ना करना आदि से गहरा संबंध है। 

लक्षण-- भूख प्यास लगना, जबान सुखना, बार-बार पानी पीने की इच्छा होना, घड़ी घड़ी में लघु शंका होना, भूख अधिक लगना, खुराक अच्छी खाने पर भी वजन घटना, फोड़े फुंसियां निकलना, घाव तथा जख्म अच्छा होने में काफी समय लगना, आलस्य आदि। 

परहेज-- चावल चीनी (मीठा), आलू, मीठे फल, शरबत तथा वनस्पति वनस्पति घी से बचें।

पथ्य-- आंवला, गाजर, टमाटर, करेला, लौकी, मूली, शलजम, हरी धनिया, पुदीना, मेथी पालक, चौलाई, बथुआ, अदरक, नींबू, खीरा, ककड़ी, फल, हरी सब्जियां, सोयाबीन, दाना मेथी, भुने चने, बेसन, दही, छाछ , बेलपत्र, तुलसी-पत्र, नीम पत्र, आदि।

विशेष--

1. नियमित प्रातः भ्रमण अथवा व्यायाम को जीवन में उतारना जरूरी है।

2. विजयसार की लकड़ी के बर्तन (गिलास) में रात को पानी रखकर सुबह उठते ही पानी को पीने से कई रोग ठीक होते देखे गए हैं, यह क्रिया मधुमेह को दूर करती है।

3. भुने हुए अनाज का सेवन मधुमेह की रामबाण औषधि है। जब तक आप अनाज या आटे को भूनकर अथार्त रोस्टेड अनाज का प्रयोग करेंगे, तब तक मधुमेह नहीं होगा और ना ही इंसुलिन की जरूरत पड़ेगी उदाहरण के लिए यदि रोटी खानी है तो जो या गेहूं के आटे को कड़ाई या तवे पर थोड़े से घी या तेल में भूरालाल होने तक भूनकर भी पर में भर लें । गूंद कर  रोटी बनाने से रोटी स्वादिष्ट तथा पौष्टिक बनेगी जो गेहूं की बाली और चने को भूनकर सत्तू बनाने को देता है गेहूं के आटे को भूनकर पटोलिया बनाएं। गेहूं ज्वार या बाजरे के आटे को भूनकर धुली  दलिया बनाकर स्वादिष्ट व्यंजन बनाएं।

भूनकर खाने से खाद्य का शीघ्र पाचन हो जाता है। और शरीर को शीघ्र शक्ति मिल जाती है । कार्बोहाइड्रेट की अंतिम परिणीति अवस्था आयुर्वेद होने के कारण इसमें चर्बी नहीं होती और ना ही शरीर में ग्लूकोस की अधिक मात्रा बनाने का डर रहता है। यदि किसी को मधुमेह हो गया मेरा है तो प्राणिमात्र को स्वस्थ रखने के लिए प्रकृति बहुत कुछ दिया है अतः रोगी प्राकृतिक उपायों द्वारा प्रदत्त वनस्पतियों के प्रयोग से अपनी को दीर्घकाल तक स्वस्थ रख सकता है।

निम्नलिखित में से कोई भी सुविधाजनक घरेलू उपचार करके स्वस्थ हो सकते हैं

1.तेजपत्रों से मधुमेह दूर करना-- इस प्रयोग से निराश रोगी भी लाभांवित हुए हैं अनुभूत प्रयोग

विधि-- तेजपत्रों को कूटकर छानकर शीशे में भर लें । इस चूर्ण में से नित्य तीन बार एक एक चम्मच भर पानी और दूध के साथ ले। खाने पीने में पथ्य एवं हल्का व्यायाम भ्रमण जरूरी है। हां ब्लड शुगर निल होने पर औषधि को बंद कर दें यदि यदि बंद परहेज के बाद मधुमेह द्वारा आता नजर आए तो एक-दो दिन फिर लेकर निरोगी बन जाए।

2. दाना मेथी-- दाना मेथी का चूर्ण बनाकर शीशे में रख लें नित्य सुबह शाम करीब 10-10 ग्राम चूर्ण भोजन से पहले पानी या छाछ के साथ खाने से मूत्र का खून में शुगर घटने लगेगी। 3-4 सप्ताह में सफलता देगी गर्भवती स्त्रियों को दाना मेथी का प्रयोग मना है ।उनके लिए तेज पत्र ठीक रहेंगे । 

3.सदाबहार पौधे के पत्ते -- इसके चार पत्ते (फूल की पंखुड़ियां नहीं) स्वच्छ पानी में साफ करके प्रातः खाली पेट चबाने से ,फिर दो घूंट पानी पीने से कुछ ही दिनों में स्थाई लाभ हो सकता है।  बच्चों को सदाबहार के पत्ते एक आस पानी में रगड़ कर दिए जा सकते हैं

4.बेल --  बेल की 10-15 पत्तियां पानी में घोलकर (संभव हो तो 5-5 नीम, श्यामा तुलसी के पत्तियां भी साथ में पीस लें) कपड़े से छान कर पीना शुरु कर दें तो मधुमेह से छुटकारा मिल जाएगा कब्ज की प्रवृत्ति अभ्यास की अधिकता वाले  रोगियों को बेलपत्र विशेष लाभकारी होते हैं

5.गेंदा की ताजी हरी पत्तियां-- गेंदा की ताजी पत्तियों को सिल पर पीस लें आधा गिलास रस निकालकर छानकर प्रातकाल पी लें इसमें शुद्ध शहद मिला दें यह मिश्रण हाई ब्लड प्रेशर मधुमेह अल्सर बवासीर और आंखों के रोगी में हितकारी रहता है

6.मधुमेह की परीक्षित और सिद्धि जवा फूल--अड़हुल के फूल की 10 कल का रोगी सवेरे खाली पेट चबा कर खाए जाए ऐसा 1 सप्ताह (या पुराना रोको तो एक से डेढ़ महीना करें) पेशाब में शर्करा आना बंद हो जाएगा

 

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