Complete treatment of Dysentery through Home Remedies (In Hindi) sagarvansi ayurveda

पेचिश के साथ आँव का सफलता पूर्ण घरेलू उपचार / Complete treatment of Dysentery through Home Remedies (In Hindi)

पेचिश आँवयुक्त (Dysentery)

ईश्वर ने मानव शरीर को इतना रचनात्मक तरीके से बनाया है कि यदि शरीर में किसी भी भाग का संतुलन बिगड़ा तो कोई ना कोई समस्या उत्पन्न हो ही जाती है आज यहां इस लेख में हम बात कर रहे हैं पेचिश आँवयुक्त जो कि मानव शरीर में होने वाली एक बड़ी समस्या है। इस समस्या में व्यक्ति के मल के रास्ते दस्त के साथ खून या रक्त का स्त्राव होने लगता है या इस समस्या में मल के साथ में भी रक्त का स्त्राव हो सकता है। इस रोग में व्यक्ति सामान्य से अधिक चिंतित हो जाता है क्योकि इसका कारण है इस रोग में उत्पन्न होने वाले लक्षण बवासीर से कुछ-कुछ मिलते जुलते होते हैं। बवासीर की समस्या में भी मल के साथ रक्त का स्त्राव होता है परंतु कुछ - कुछ भिन्न भी  होते है क्योंकि पेचिश में आँव (Mucus) भी आती है। यह एक तरह से लिसलिसा सा तरल पदार्थ होता है जो मल मार्ग से मल के साथ निकलता है कह सकते हैं  कि आँव एक तरह से नाक जैसा लिसलिसा तरल होता है। पेचिश की समस्या व्यक्ति की आँतों में इंन्फ्लेमेशन (शरीर को अपने को संक्रमण से बचाने की प्रतिक्रिया से होने वाला लक्षण) के कारण शुरू होती है जिस वजह से मल करते समय रक्त का या म्यूकस का मल के रास्ते मल के साथ स्त्राव होता है। पेचिश व्यक्ति की बड़ी आँत या पेट में इंफेक्शन के कारण से उत्पन्न होता है।

 

 पेचिश के लक्षण

1.  पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द महसूस होना।

2.  मल के साथ म्यूकस या खून स्त्राव होना।

3.  उल्टी या बुखार जैसी समस्याएं।

4.  कमजोर होना।

5.  बार बार मल के आने जैसा महसूस होना।

6.  भूख ना लगना

 

उपचार

साफ की हुई सौंफ 300 ग्राम की मात्रा में लें और मिश्री भी 300 ग्राम ले लें सौंफ के 2 बराबर हिस्से कर लें एक हिस्सा तवे पर भून लें भुनी हुई और बची हुई सौंफ लेकर बारीक पीस लें और उतनी ही पिसी हुई मिश्री मिला लें इस चूर्ण को छः ग्राम लगभग 2 चम्मच की मात्रा में दिन में चार बार खाएं इसके ऊपर से दो घूंट पानी भी पी सकते हैं। आँवयुक्त पेचिश नई या पुरानी मरोड़ देकर थोड़ा थोड़ा मल तथा आँव के लिए सर्वोत्तम उपाय है। सौंफ खाने से बस्ती शूल या पीड़ा सहित आँव आना मिट जाता है।

सहायक उपचार

 दही भात मिश्री के साथ खाने से आँव  मरोड़ो के दस्तों में आराम आता है।

 

 विकल्प

1.  दाना मेथी मेथी शुष्क दाना का साग बनाकर रोजाना खाएं अथवा मेथीदाना का चूर्ण 3 ग्राम दही में मिलाकर उपयोग करें आँव की बीमारी में लाभ के अतिरिक्त इससे मूत्र का अधिक आना भी बंद होता है। मेथी के बीजों को डॉक्टरों ने कॉड लिवर ऑयल के समान लाभकारी बताया है।

2.  चौलाई का साग बिना मिर्च या तेल में पका हुआ लगभग 150 ग्राम प्रति दिनप्रतिजन प्रतिदिन 11 दिनों तक खाने से पुराने से पुराना आँव का रोग जड़ से दूर होता है। गुर्दे की पथरी (किडनी स्टोन) में भी चौलाई का साग लाभकारी है। यह साग राजस्थान में खूब पाया जाता है।

3.  छोटी हरड़ तथा पीपर का चूर्ण हरड़ छोटी दो भाग और पीपल छोटी एक भाग दोनों का बारीक चूर्ण कर लें एक से डेढ़ ग्राम चूर्ण गर्म पानी से दोनों समय भोजन के बाद आवश्यकतानुसार 3 दिन से 1 सप्ताह तक नियमित लें इससे आँव और  शूलसहित दस्त शांत होते हैं। यह अमीबिक पेचिश में विशेष लाभप्रद है।