Home Remedies for Aging (budhape ko jawan rakhne ka gharelu upchar) sagarvansi ayurveda

योवन की रक्षा करने वाला और बुढ़ापे को जवान रखने का घरेलू उपचार / Home Remedies for Aging (budhape ko jawan rakhne ka gharelu upchar)

बुढ़ापे को जवान रखने का घरेलू उपचार या बुढ़ापे को घरेलू उपाय से दूर रखने और योवन की रक्षा करने का आसान सा तरीका आज हम आपको बताने वाले हैं। जैसा कि आप और हम सभी जानते हैं कि आज के इस कठिन दौर में या व्यस्तता भरे जीवन में व्यक्ति अपने शरीर पर ध्यान नहीं दे पाता है। एसा इसलिए होता है क्योंकि अत्यधिक पैसे कमाने के प्रति लगभग हर व्यक्ति का झुकाव होता है और आप सभी जानते हैं कि पैसा कमाना काफी मेहनत वाला काम होता है और जैसा कि हमारे बड़े बुजुर्ग भी कहा करते हैं कि पैसा कमाना आसान काम नहीं होता इसलिए जब व्यक्ति पैसा कमाने की क्रिया में जुट जाता है तो वह इतना व्यस्त हो जाता है की बस कहना ही क्या। इसी कारण से वह अपने स्वास्थ्य या कहें कि शरीर के प्रती ठीक तरह से ध्यान नहीं दे पाता क्योंकि व्यस्तता के चलते अनियमित खान-पान, अनियमित दिनचर्या जीवन शैली के चलते शरीर के लिए आवश्यक खानपान आवश्यक पोषक तत्वों के अभाव के कारण मानव शरीर धीरे-धीरे अनेक प्रकार की बीमारियों से घिर जाता है और इस कारण से उम्र ना होते हुए भी व्यक्ति बूढ़ा या व्रद्ध के समान हो जाता है क्योंकि उस व्यक्ति की स्थिति बीमारियों से घिरने के बाद ऐसी हो जाती है जैसे कोई वृद्धजन हो और तमाम बीमारियों और रोगों के चलते काफी जल्दी व्यक्ती का जवानी से साथ भी छूट जाता है। आज हम यहां आपको उपरोक्त समस्या से जुड़ा उपरोक्त समस्या से निजात पाने के लिए एक ऐसा घरेलू उपचार बताने जा रहे हैं जिसके उपयोग से या उस उपचार में बताई औषधि के सेवन से वयक्ती बुढ़ापे को दूर भगाकर सालों साल खुद को युवकों जैसा महसूस करने लगेंगे। इसके अतिरिक्त औषधि से ब्लड प्रेशर, बालों की सफेदी (सफेद बाल), रक्त का थक्का बनने की वजह से रूकावट के कारण मस्तिष्क की धमनियों का फटना इत्यादी कई रोगों से बचाने में काम आता है। इसलिए हमने इस औषधि का नाम बुढ़ापे को जवान रखने का घरेलू उपचार रखा है। इसे यदि आपने अपना लिया तो बस समझें की अब आप भी सालों साल जवान रहेंगे।

बुढ़ापे को जवान रखने का घरेलू उपचार (Home Remedies for Aging)

आँवलों के मौसम में  प्रतिदिन प्रातः काल व्यायाम अथवा भ्रमण आदि करने के बाद 2 पके और  पुष्ट हरे आँवलों को खूब अचछी तरह चबाकर खाएं और यदि इस प्रकार से कच्चा आंवला ना खा सकें तो आँवलों का रस निकाल लें और 2 चम्मच की मात्रा में आँवलों का रस और शहद दो चम्मच की मात्रा में दोनो को मिलाकर पिएं जब आँवलों का मौसम ना रहे तब सूखे हुए आँवलों को बारीक कूट-पीसकर कपड़े से छान कर बनाया गया आँवले का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में (लगभग 3 ग्राम) रात को सोते समय अंतिम वस्तु के रूप में शहद में मिलाकर या जल के साथ भी ले सकते हैं। इस तरह तीन से चार माह तक नित्य  प्रतिदिन आँवलों का प्रयोग करने से मनुष्य खुद अपनी काया पलट सकता है। निरंतर प्रतिदिन इसका सेवन करने से भूख और पाचन शक्ति बढ़ जाती है, गहरी नींद आने लगती है, सिर दर्द दूर हो जाता है, मानसिक और मर्दाना शक्ति बढ़ती है, बाल काले चमकदार हो जाते हैं, दांतों में मजबूती जाती है, कांति ओज और तेजस्विता की वृद्धि होती है और मनुष्य बुढ़ापे में भी जवान बना रहता है। आँवला में रोग प्रतिरोधक गुण होने के कारण रोगों से स्वतः ही बचाव होता है और मनुष्य सदैव निरोग रहकर लंबी आयु प्राप्त करता है।

विशेष

1.  आँवला के प्रयोग करने के साथ सात्विक भोजन करना चाहिए।

2.  आँवला एक उच्च कोटि का रसायन है। यह रक्त में से हानिकारक और विषैले पदार्थों को निकालता है और व्रद्ध मनुष्यों को पुनः जवान बनाने में सक्षम है। इसके औषधि के नियमित सेवन से रक्त वाहिनियाँ लचीली बनी रहती हैं और रक्त वाहिनियाँ की  दीवारों की कठोरता को दूर करता है जिससे रक्त का संचार भली-भांति होने लग जाता है। रक्त वाहिनियों में लचक (Flexibility) बने रहने के कारण मनुष्य का ना तो हर्ट फेल होता है और ना ही उच्च रक्तचाप की समस्या रहती है और ना ही रक्त का थक्का बन जाने से रूकावट के कारण मस्तिष्क की धमनीयाँ फटती है।

3.  आँवला के निरंतर लगातार सेवन से  रस, रक्त, मेद, मज्जा, मांस, अस्थि और शुक्र इन सब धातुओं से मलीन या मृत परमाणु देह से बाहर निकल जाते हैं और उनके स्थान पर नूतन और सबल परमाणुओं का प्रवेश हो जाता है। रक्त कोशिकाएं बुढ़ापे में भी लचीली बनी रहती हैं और चेहरे की झुर्रियां दूर हो जाती हैं। मनुष्य का शरीर मस्तिष्क वृद्धावस्था में भी नव युवकों की भांति चुस्त ताकतवर बना रहता है।

सहायक उपचार

1.  बुढ़ापे पर विजय प्राप्त कर योवन को स्थाई बनाने के लिए पेड़ की डाल पर पके हुए पपीते का (पेड़ पर पका हुआ हो किसी रसायन द्वारा पकाया हुआ हो) नियमित सेवन करना चाहिए। पपीता योवन के लिए टॉनिक के जैसा काम करता है। इसका भरपूर लाभ उठाने के लिए इसे खाली पेट नाश्ते के रूप में उपयोग करना चाहिए। पपीते का फल खाते रहने वाले व्यक्ति को तपेदिक, दमा, आंखों के रोग, रक्त हीनता आदि रोग नहीं होते यह आँतों की सफाई करने में यह अति उत्तम फल होता है। यह पाचन संस्थान के रोगों को दूर करने के लिए भी उत्तम फल माना जाता है।

2.  आरोग्य दीर्घजीवन तक योवन तथा जवान बने रहने के लिए दिन के समय में बायीं और रात के समय में दायीं नासिका से श्वास लेने की आदत डालने पर मनुष्य चिरकाल (Forever) तक युवा बने रह सकते है। इस क्रीय को करने के लिए रात्रि को बाएं करवट सोना चाहिए ताकि दाएं नथुने से श्वास ले सकें और दिन में आराम या विश्राम करते समय दाहिने करवट सोए ताकि बाएं नथुने से सांस ले सकें।