Is aasan se ayurvedic nuskhe se rakhe apne dil ko saalo sal jawan

दिल के ऑपरेशन तक को टाल दें ऐसा है यह आयुर्वेदिक नुस्खा

आधुनिक जीवन शैली अत्यंत दोषपूर्ण होने के कारण आज का मानव उनके संघातक बीमारियों से ग्रस्त है,  जिनमें प्रमुख है हृदय रोग।  इस रोग से प्रत्येक वर्ष लाखों व्यक्तियों की मृत्यु हो जाती है। पूरे विश्व में हृदय रोग से मरने वालों में भारतीयों की संख्या सर्वाधिक है। प्रामाणिक एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत का हर 25वां व्यक्ति हृदय रोग से पीड़ित हैं। कोलेजन तथा सेल्स के संचित होकर एथेरोमा के रूप में परिवर्तित हो जाने के कारण यह रोग उत्पन्न होता है।  हृदय को रक्त प्रदान करने वाली वाहिनियों में जब वसा अधिक जमा हो जाता है तो उनका आयतन घट जाता है रक्त वाहिनियों के संकुचित हो जाने के कारण रक्त के प्रवाह में बाधा पैदा होने लगती है और हृदय की मांसपेशियों को जितना आक्सीजन मिलना चाहिए उतना नहीं मिल पाता।  परिणाम होता है हृदय-शूल जिसे आम भाषा में एनजाइना कहते हैं। यही कालांतर में हृदयाघात का कारण बन जाता है।  हृदय रोग के अनेक प्रकार हैं।  कुछ ऐसे हृदयरोग भी हैं जो छोटे-छोटे बच्चों को अपना शिकार बना लेते हैं। हृदय रोग में गठिया गठिया से उत्पन्न ह्रदय रोग को सबसे अधिक खतरनाक माना जाता है।  यह रोग 5 से 15 वर्ष की उम्र में शुरू होता है। आयुर्विज्ञान की भाषा में स्टेपटोफोकल के संक्रमित होने के कारण बच्चों के संधि क्षेत्रो में पीड़ा होती है अथवा वह अपने गले में खराश के बार-बार होने के कारण परेशानी का अनुभव करता है। जोड़ों में दर्द अथवा खांसी बच्चों में गठियाजन्य हृदय रोग के लक्षण हैं। यदि 5 से 15 वर्ष की उम्र में बच्चों में यह लक्षण दिखाई पड़े तो उन्हें किसी हृदय रोग विशेषज्ञ से दिखाकर उनकी सम्यक् चिकित्सा करानी चाहिए अन्यथा उनका ह्रदय-वॉल्व क्षतिग्रस्त हो सकता है।एक सर्वेक्षण के अनुसार विदेशों की अपेक्षा भारत में कम उम्र के बच्चों में यह रोग संक्रामक बीमारी की तरह अधिक तेजी से फैलता जा रहा है।  इसलिए समय पर सावधान होने की आवश्यकता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में हृदय रोग कम होता है परंतु वे भी इससे मुक्त नहीं हैं।

 

हृदय रोग के लक्षण

 

हृदय रोग का एक प्रमुख लक्षण वक्षः स्थल के बायीं ओर दर्द का उभरकर बायीं बाँह में फैलते हुए ग्रीवा-मंडल तक चला जाना। कभी-कभी दर्द बायीं  वक्षः स्थल से गर्दन की ओर यात्रा करते हुए उंगलियों तक फैल जाता है। छाती में भारीपन या कड़ेपन का अनुभव, प्रदाह और घबराहट भी हृदय रोग के लक्षण हैं। कभी-कभी ऐसा होता है कि व्यक्ति का हृदय रोगग्रस्त हो जाता, है परंतु इसके लक्षणों का संज्ञान नहीं होता। हृदय रोग जन्मजात भी होता है। शिशु के हृदय की बनावट असामान्य और विकृत हो तो समझना चाहिए कि उसकी रुग्णता जन्मजात है।

दिल के समस्त रोगों में अपनाने योग्य सलाह

 

आवश्यकतानुसार सूखे आंवले को कूट-पीसकर बारीक चूर्ण बना लें और उसमें बराबर वजन पिसी हुई मिश्री मिलाकर किसी कांच के बर्तन में रखें नित्य सवेरे खाली पेट 6 ग्राम (2 चम्मच भर) चूर्ण को पानी के साथ फांक लेने से कुछ ही दिनों में ह्रदय के समस्त रोग दूर हो जाते हैं। विशेषकर बढ़ी हुई हृदय की धड़कन, हृदय की कमजोरी और चेतना-शून्यता आदि रोगों में परम लाभकारी एवं चमत्कारी प्रयोग है।

 

विशेष

1.आंवला दिल की तेज धड़कन, अनियमित हृदय गति, दिल का फैल जाना, दिल के ठीक कार्य न करने से उत्पन्न उच्च रक्तचाप में हानिरहित औषधि और खाद्य पदार्थ है। यह हृदय को शक्तिशाली बनाता है।

2. शुरूआती गर्मियों  में  21 दिन से 1 माह तक सेवन करना अच्छा रहता है।

3. आंवला का निरंतर सेवन रक्त वाहिनियों को मुलायम और लचीला बनाता है। तथा रक्त वाहिनियों की दीवारों को कठोर तथा मोटा हो जाने का दोष दूर करता है। इसी कारण रोगी का हाई ब्लड प्रेशर दूर हो जाता है और रक्त वाहिनियों में रक्त का दौरा भली प्रकार होने लग जाता है।

4. प्याज का रस खून में कोलेस्ट्रोल की मात्रा को कम करके दिल के दौरे को रोकता है प्याज स्नायु संस्थान (नर्वस सिस्टम) के लिए टॉनिक, खून साफ करने वाला, पाचन में सहायक और हृदय की क्रिया को सुधारने वाला तथा अनिद्रा को रोकने वाला उपाय है।

5. अर्जुन की ताजा छाल को छाया में सुखाकर चूर्ण बनाकर रख लें 250 मिलीलीटर दूध मैं 250 मिलीलीटर (बराबर वजन)  पानी मिलाकर हल्की आंच पर रख दें और उसमें उपरोक्त 3 ग्राम (एक चाय की चम्मच हल्की भरी हुई) अर्जुन की छाल का चूर्ण मिलाकर उबालें जब उबलते-उबलते पानी और दूध का मिश्रण आधी मात्रा रह जाए तब उसे आंच से उतार कर पीने योग्य होने पर छानकर सेवन करें इससे हृदय मजबूत होता है और दिल का दौरा पढ़ने से बचाव होता है। बशर्ते दूध स्वस्थ देसी गाय का ही हो।

 

अपान वायु मुद्रा यह मुद्रा दोनों हाथों से एक साथ किसी सहज आसन में बैठे-बैठे या लेटे-लेटे की जानी चाहिए यदि किसी को हर्ट अटैक या हृदय रोग एकाएक आरंभ हो जाए तो इस मुद्रा को अविलंब करने से इंजेक्शन से भी अधिक प्रभावशाली रूप में हार्ट अटैक को तत्काल रोका जा सकता है हार्ट अटैक को रोकने के लिए यह रामबाण प्रयोग है। हृदय रोगों जैसे हृदय की घबराहट, हृदय की तेज या मंद गति, हृदय का धीरे-धीरे बैठ जाना, आदि में कुछ ही क्षणों में लाभ होता है।

 

अपान वायु मुद्रा अंगूठे के पास वाली पहली उंगली को अंगूठे की जड़ में लगाकर अंगूठे के अग्रभाग को बीच की दोनों उंगलियों के अगले  सिर से लगा दें सबसे छोटी उंगली को अलग रखें इस स्थिति का नाम अपानवायु मुद्रा है

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सावधानी उपरोक्त सभी उपचार आकस्मिक समय पर इस्तेमाल करने से पहले चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।