Proven successful treatment of heart disease with gourd juice in hindi sagarvansi ayurveda

लौकी के रस से ह्रदय रोग का सिद्ध सफल उपचार / Proven successful treatment of heart disease with gourd juice in hindi

तुलसी, घिया और पुदीना का हृदय रोग में रामबाण प्रयोग

आज के युग में सबसे तेजी से फैलने वाले रोगों मैं हृदय रोग सबसे पहले स्थान पर आता है। हृदय रोगों के बढ़ने का कारण खान - पान की स्वच्छन्दता, भौतिकवाद की होड़, तरह - तरह के मांसाहारी एवं गरिष्ठ भोज्य पदार्थ के प्रति बढ़ती रुचि, शारीरिक श्रम में अभिरुचि या शून्यता, मानसिक तनाव, आदि हृदय संबंधित रोगों की उत्पत्ति के प्रमुख कारण है। मनुष्य के हृदय की शिरायें या कोशिकाओं मैं जब रुकावट या अवरूद्ध जाता है तब हृदयघात की समस्या की संभावना बन जाती है। अत्यधिक चिकनाई युक्त,वसा युक्त भोजन मनुष्य के शरीर में रक्त के थक्के जमाता है। तथा आगे चलकर इसका दुष्परिणाम शिराएं या कोशिकाएं अवरुद्ध के रूप में प्रकट होता है। एलोपैथी व आधुनिक विज्ञान में हृदय रोग की समस्या के निदान के लिए बाईपास सर्जरी, पेसमेकर जैसी तमाम अन्य खर्चीली सुविधाओं की खोज की है परंतु खर्चीली सुविधाओं का उपयोग साधारण रोगी नहीं कर सकता और इससे जुड़े अन्य तथ्य यह भी है कि  इस तरह की खर्चीली सर्जरी के बाद मनुष्य कई अन्य समस्याओं से भी ग्रसित हो जाता है।

 

उपचार

घिया जिस का दूसरा नाम लौकी भी है। यह हृदय संबंधी रोगों में कायाकल्प या कहें की रामबाण औषधि का काम भी करती है। एक प्रशिक्षण में यह सिद्ध हुआ है की लौकी हृदय के लिए बहुत लाभकारी है। एक शोध के चलते अनेक हृदय समस्या से लिप्त रोगियों ने इसका उपयोग कर रोग से छुटकारा पाया है। हृदय रोगियों के लिए इस चमत्कारी व अनुभूत प्रयोग की विधि इस प्रकार है। लौकी को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें और फिर छिलका सहित लौकी को कद्दूकस से घिस लें कद्दूकस की हुईलौकी को सिलबट्टे पर पीस लें या फिर ग्राइंडर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। लौकी को पीसते समय उसमें 5 से 6 पुदीने की पत्तियां और 7 से 8 तुलसी की पत्तियों को भी घिसी हुई लौकी के साथ सिलबट्टे पर पीस लें जब यह तीनों चीजें ठीक तरह से पिस जाएं तब इस मिश्रण को साफ कपड़े से छान लें छनें हुए रस की मात्रा कम से कम 150 एम० एल० की मात्रा में होनी चाहिए इस बने हुए रस में करीब समान अनुपात में पीने का पानी मिला लें तब इस रस की मात्रा बढ़कर 300 मिलीलीटर हो जाएगी इस पेय मैं चार पिसी काली मिर्च के दाने और 1 ग्राम सेंधा नमक मिला लें अब इस रस को भोजन करने के 45 मिनट बाद सुबह दोपहर एवं रात्रि में तीन बार लें शुरुआत में इसे तीन-चार दिन तक इस पेय की मात्रा कम भी ली जा सकती हैं परंतु रस हर बार ताजा ही होना चाहिए पेय के सेवन से यदि पेट में कुछ गड़गड़ाहट महसूस हो तो चिंतित या परेशान ना हो क्योंकि यह रस या पेययह रस पेट के तमाम विकारों को भी नष्ट करने में सहायक है। यदि किसी व्यक्ति को 3 बार लौकी का रस लेने में असुविधा या किसी प्रकार की कठिनाई हो रही हो इस रस को आधा आधा किलो घिया का रस घिया या लौकी का रस इसी प्रकार से तैयार किया हुआ सुबह व श्याम सेवन करें पहले 5 दिन तक लौकी का रस लगातार लेना होगा फिर 25 दिन का अंतराल देकर 5 दिन तक लगातार लें इसी प्रकार लौकी के रस को कम से कम 3 महीने तक सेवन करें उपचार के दौरान ध्यान रहे कि कोई भी खट्टी  वस्तु का सेवन ना करें, ना ही खट्टे फल, ना टमाटर, ना नींबू। हृदय के रोगियों को मांस, मदिरा, धुम्रपान आदि का पूर्ण रूप से त्याग करना आवश्यक है, 4 से 5 किलोमीटर टहलना भी जरूरी है।

 

उपचार-2

यदि गड़बड़ करने लगे तो एक अन्य उपचार यह भी है। एक चम्मच पान का रस एक चम्मच लहसुन का रस एक चम्मच अदरक का रस और एक चम्मच शहद चारों सामग्रियों के रस को एक साथ मिलाकर सेवन किया जाए। इसमें पानी मिलाने की कोई आवश्यकता नहीं है। इस रस को दिन में एक बार सुबह और एक बार शाम को सेवन करें इस रस को तनाव तथा चिंता मुक्त होकर इसका प्रयोग करें यदि हृदय में कोई और भी कठिनाई हो रही हो तो जो दवा लेते हैं उसे ले लें।

 

चमत्कारी लेप

इस लेप ने कई हृदय रोगियों को बाईपास सर्जरी से बचाया लेप बनाने की विधि एक तोला साबुत काली उड़द को रात भर के लिए गरम पानी में भिगो दें सुबह उड़द के दानों को पानी में से निकाल लें और उड़द को छिलके के साथ सिलबट्टे पर पीस लें। उड़द की पिसी हुइ पिट्ठी मैं एक तोला गुग्गुल का चूर्ण में मिला लें और इन दोनों को अब खल बट्टे में डालकर एक तोला अरंडी का तेल और गाय के दूध से बना मक्खन एक तोला की मात्रा में इसमें मिला दें काफी देर तक खल - बट्टे में रगड़ते रहे। स्नान करने के बाद शरीर को पोंछकर  इस लेप को छाती से पेट के आसपास तक मल लें। 4 घंटे के लिए लेप को लगाने के बाद लेट जाएं आवश्यकता अनुसार उठ बैठ भी सकते हैं। जब लेप सूख जाए तो स्नान कर लें यह प्रयोग प्रतिदिन सुबह 5 दिन तक करना चाहिए 1 महीने के अंतराल के बाद फिर 5 दिन तक करें ऐसा करने से ह्रदय रोग से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी।