Home Remedy and Ayurvedic treatment of Prostate problem in hindi sagarvansi ayurveda

प्रोस्टेट की समस्या का घरेलू व आयुर्वेदिक उपचार / Home Remedy and Ayurvedic treatment of Prostate problem in hindi

 वृद्धावस्था में प्रोस्टेट का कष्टदायक रोग (Prostate problem)

प्रोस्टेट जिसे पौरुष ग्रंथि भी कहा जाता है। यह पुरुषों में पाई जाने वाली ग्रंथि होती है। प्रोस्टेट एक तरह से सिर्फ और सिर्फ पुरुषों में पाये जाने वाला रोग है क्योंकि यह रोग जिस ग्रंथि में उत्पन्न होता है वह ग्रंथि सिर्फ पुरुषों में ही पाई जाती है। इस कारण से यह रोग सिर्फ पुरुषों में पाया जाने वाला रोग है। यह रोग काफी सारी छोटी-छोटी ग्रन्थीयों के एकत्रित होने से प्रारंभ होता है। प्रोस्टेट ग्रंथि की पुरुष प्रजनन मैं अति आवश्यकता अथवा महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बढ़ती उम्र के साथ रोग के होने की संभावना भी बढ़ जाती है। उम्र बढ़ने के साथ प्रोस्टेट की ग्रंथियों के ऊतकों में कुछ ग्रंथियों का अपने आप विकास होने लगता है परंतु यह विकसित ग्रंथियां शरीर में किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं करती हैं। ग्रंथियों के आकार में धीरे-धीरे वृद्धि होती है और धीरे-धीरे बढ़ते बढ़ते जब ग्रंथियों का आकार सामान्य से बहुत अधिक बढ़ जाता है तो मूत्र मार्ग तथा मूत्राशय की क्रीयाओं में अवरुद्ध उत्पन्न होने लगता है। अधिकांश यह रोग 50 वर्ष से अधिक आयु वाले पुरुषों में से लगभग 50% लोग ऐसे होते हैं जिनके प्रोस्टेट में सूजन की समस्या होती है जैसे - जैसे व्यक्ति की आयु में वृद्धि होती है वैसे - वैसे इस रोग का प्रमाण 90% हो जाता है अधिकांश पुरुषों में प्रोस्टेट का बढ़ना सुसाध्य होता है परंतु कई मामलों में यह अधिक गंभीर भी हो जाता है।

 

लक्षण

1.  बार-बार पेशाब आना

2. पेशाब करने में तकलीफ होना

3. एक बार में खुलकर पेशाब ना होना

4. पेशाब को रोक ना पाने की समस्या

5. रात को पेशाब करने के लिए बार-बार उठना

6. मूत्राशय पूरी तरह खाली ना होने की वजह से बार बार पेशाब  में संक्रमण या पथरी होना

7. बूंद - बूंद पेशाब होना, पेशाब बंद हो जाना

8.मूत्र संक्रमण के कारण किडनी में संक्रमण होना

9. रोगी को सिर दर्द

10. घबराहट, थकान, चिड़चिड़ापन तथा अधिक कमजोरी महसूस होना आदि परेशानियां होने लगती हैं।

 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने के कारण

1. नशीले पदार्थों का अधिक सेवन

2. कब्ज बनी रहना

3. बढ़ती उम्र का अनुवांशिक और हारमोनल प्रभाव

4. अनुचित खान पान तथा दूषित भोजन का सेवन

5. मूत्र तथा उसकी गति को रोकना 

6, लगातार लंबे समय तक बैठने का कार्य करने से वस्ती प्रदेश पर बोझ पड़ता है जिस कारण इस ग्रंथि में सूजन हो जाती है।

 

औषधीय उपचार

1. गुग्गुल लगभग ½  से 1 ग्राम सुबह-शाम गुड़ के साथ खाने से लाभ होता है।

2.  लगभग 5 ग्राम नागवंशी की जड़ की छाल सिनुआर के पत्ते का रस करंज के साथ सुबह-शाम      खाने से भी लाभ मिलता है।

3.  राई को नाभि (टुंडी) के नीचे पेड़ू पर पीस कर लेप करने से पौरुष ग्रंथि की सूजन दूर हो जाती है। सीताफल के बीज में काफी मात्रा में पोषक तत्व होते हैं जैसे आयरन, कॉपर, मैग्नीशियम, फास्फोरस, विटामिन के, मैग्नीज, प्रोटीन जरूरी फैटी एसिड पाए जाते हैं। सीताफल के बीज जिंक के बेहतरीन स्रोतों में से एक है। प्रतिदिन 60 मिलीग्राम जिंक का सेवन प्रोस्टेट से जूझ रहे मरीजों के लिए बेहद लाभप्रद है। सीताफल को कच्चा या भूनकर या फिर दूसरे बीजों के साथ मिलाकर खा सकते हैं। सलाद में मिलाकर भी खाया जा सकता है, पोहा में मिलाकर या सूप में डाल कर भी खाया जा सकता है। सीताफल के दस ग्राम बीजो का प्रतिदिन सेवन करने से प्रोस्टेट को आराम से काबू किया जा सकता है।

4. गोखरू मूत्र संबंधित रोगों में अधिक लाभकारी है इसे लगभग 5 ग्राम की मात्रा में गुनगुने पानी से लें

                                   

नोट :-  उपरोक्त सभी चीजों का सेवन करने से एक से डेढ़ घंटा पहले तथा एक से डेढ़ घंटा बाद तक कुछ भी ना खाएं और ना ही कुछ पीऐं यह प्रयोग करने वाले रोज सुबह खाली पेट लौकी के जूस में 5-5 पत्ते तुलसी पुदीना के डाल कर सेवन करें।