veerya ko badhane ka gharelu upchar home remedy to improve semen quality or quantity sagarvansi ayurveda

वीर्य वर्धक अथवा धातु वर्धक या वीर्य बढ़ाने व वीर्य की अच्छी और स्वस्थ गुणवत्ता के उत्पादन के लिए घरेलू उपचार / veerya ko badhane ka gharelu upchar home remedy to improve semen quality or quantity

धातु वर्धक अथवा वीर्य वर्धक घरेलू उपचार

 

धातु अथवा वीर्य मानव प्रजाति में पुरुष इंद्रियों द्वारा उत्पन्न किया जाने वाला एक पदार्थ होता है। इस पदार्थ में शुक्राणुओं की उपस्थिति होती है। पुरुषों द्वारा घातु या वीर्य के उतपादन में शुक्राणुओं  की संख्या कम  होना  पुरुषो की समस्या या विकार कहलाता है। ऐसी समस्या का  पुरुषों में होना एक काफी सामान्य सी समस्या है। पुरुषों की इस समस्या से उनके वैवाहिक जीवन में तमाम प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं। इस समस्या से कई परेशानी उतपन्न होती हे जिसमें सबसे बड़ी समस्या है पुरुषों द्वारा कम शुक्राणुओं के उत्पन्न होने पर गर्भधारण की समस्या होना। शुक्राणुओं की संख्या में कमी होने वाली स्थिति या समस्या को ओलिगोस्पर्मिया के नाम से जाना जाता है।ओलिगोस्पर्मिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या 15 मिलीयन प्रति एम० एल० से कम पाई जाती है इसके अलावा यदि वीर्य के नमूने द्वारा जांच में शुक्राणुओं की संख्या पाई जाए ऐसी स्थिति को एजोस्पर्मिया के नाम से जाना जाता है। उपरोक्त समस्या के चलते अपर्याप्त या कम शुक्राणुओं का उत्पादन और गुणवत्ता के चलते पुरुषों में बांझपन का मुख्य कारण यही होता है।  कम शुक्राणुओं के उतपन्न होने का कारण शुक्राणुओं की संख्या मैं कमी होने के कई कारण होते हैं जैसे अधिक धूम्रपान करना, खराब भोजन का सेवन, पीड़ित द्वारा नशीली दवाओं का उपयोगव्यायाम की कमी एवं कभी - कभी एक आंतरिक कारक  वैरीकोसेले  भी हो सकता है जो शुक्राणुओं की संख्या को कम कर सकते हैं। इसके अलावा कुछ और भी बाहरी कारण होते हैं। जिनकी वजह से पीड़ित के शुक्राणुओं पर प्रभाव होता है।  सामान्य रूप से शुक्राणुओं के उत्पादन पर गर्मी का हानिकारक प्रभाव हो सकता है सोना या गर्म टब के लगातार उपयोग तथा लंबे समय तक या काफी देर तक बैठना इसके अलावा टाइट  अंडरवियर एवं मोटापा आदि कारण अंडकोष के तापमान को बढ़ा सकते हैं। अधिक धूम्रपान और शराब के कारण भी शुक्राणुओं की संख्या कम हो सकती है। हार्मोन संतुलन पर तनाव का एक बड़ा प्रभाव हो सकता है। जो बदले में शुक्राणु उत्पादन को प्रभावित कर सकता है।

 

धातु वर्धक अथवा वीर्य वर्धक घरेलू उपचार

 

शतावरी का चूर्ण लेकर उसे कपड़े से छान लें। छने हुए  शतावरी को 3 ग्राम या एक चम्मच की मात्रा में फांककर  ऊपर से अंदाजे से 250 ग्राम की मात्रा में गुनगुना दूध पी लें। इस प्रयोग से वीर्य वृद्धि और वीर्य पुष्टि हो कर खूब शक्ति बढ़ती है।

विशेष

1. इसे प्रातः एवं रात्रि सोते समय  निरंतर 40 दिल से 60 दिन तक सेवन करें।

2. इस रसायन के सेवन से नेत्र ज्योति में भी सुधार होता है कई लोगों का इस प्रयोग को कर - कर चश्मा भी उतर गया है।

3. धातु पौष्टिक पदार्थों के सेवन काल की सावधानियां अवश्य रखें।

विकल्प

प्याज (सफेद प्याज हो तो उत्तम है) का रस 6 ग्राम या लगभग 2 चम्मच में इतनी ही मात्रा में  शुद्ध  शहद मिलाकर नित्य सवेरे खाली पेट सेवन करने से वीर्य की वृद्धि होती है।

 

बिशेष

आवश्यकता के अनुसार 21 दिन से 90 दिन तक प्रयोग करें इससे उदर रोग और उच्च रक्तचाप में भी लाभ होता है।

 

धातु शोधक

हरे आंवले का रस 10 ग्राम की मात्रा में एवं शहद 10 ग्राम की मात्रा में ले लें आंवले के मौसम में नित्य प्रातः महीने 2 महीने दोनों को मिलाकर पीने से वीर्य विकार नष्ट होकर धातु शुद्धि होती है।

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