What is Night fall, why it occurs, how it can be treated in hindi sagarvansi ayurveda

स्वप्नदोष के प्रमुख कारण और उपचार की पूर्ण विधि पढ़िए यह देसी नुस्खा / What is Night fall, why it occurs, how it can be treated in hindi

स्वप्नदोष  

यह एक ऐसी समस्या है जो आमतौर पर युवकों में पाई जाती है। इस समस्या में पुरुषों का सोते समय किसी अश्लील स्वप्न देखने के कारण बीर्य का प्रवाह होना ही स्वप्न दोष कहलाता है। यह समस्या पुरुषों में पायी जाती है। महिलाओं में स्वप्नदोष के कारण और लक्षण थोड़े अलग होते हैं। पुरुषों में यह एक आम समस्या है। अधिकांश यह युवकों में पाई जाती है इस समस्या के कारण निम्नलिखित हैं:-

* अश्लील कल्पनाएं या स्वप्न देखना

* अश्लील फिल्म देखना

* कामवासना या संभोग जैसे ख्याल

* मन में किसी नारी का चिंतन या स्मरण

*अत्याधिक कामुक प्रवत्ती

स्वप्नदोष से उत्पन्न समस्याएं

 स्वप्नदोष स्वतः ही एक समस्या है। परंतु इसके साथ और भी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। जैसे वीर्य प्रवाह से शरीर में कमजोरी का अनुभव, मूत्रेंद्रिय के लाल भाग  में जलन होना, अधिक वीर्यपात से शीघ्रपतन की समस्या, वीर्यपात से हुए अपने अंगवस्त्र या कभी-कभी शयन वस्त्र तक पड़े निशानों को छुपाना या बड़ों के सामने लज्जित होना आदि।

 

समस्या का उपाय

आंवलों को धूप में सुखाकर उनकी गुठली को निकालकर आंवलों को महीन कूट लें या चूर्ण बना लें। इस मात्रा की दोगुनी मात्रा में पिसी हुई मिश्री या देसी खाँड़ (तगार) भी ले सकते हैं।. इन दोनों को इस मात्रा में मिलाकर रख लें। इस मिश्रण को रोज रात्रि में विश्राम करने से 30 से 40 मिनट पूर्व दो चम्मच की मात्रा में पानी के साथ लगातार 2 सप्ताह तक सेवन करने से स्वप्नदोष में आराम होता है। जिन व्यक्तियों को यह दोष ना भी हो वह भी इस औषधि का सेवन कर सकते हैं। इससे वीर्य विकार या वीर्य से जुड़ी कई समस्या को भी ठीक कर सकते हैं, जैसे शीघ्रपतन, वीर्य का पतलापन, आदि दूर होते हैं इसके अलावा यह एक रक्तशोधक का काम भी करती है, तथा शरीर का पीलापन, कब्ज और सर दर्द व नेत्रों पर भी लाभकारी असर करती है इसके अतिरिक्त बीर्य प्रवाह से हुई कमजोरी को दूर करशरीर में स्फूर्ति तथा वीर्यवृद्धि कर वीर्य रक्षण भी करती है।

 

विशेष :

1. पुरुष द्वारा नींद में वासनात्मक स्वप्न देखना, अथवा कामुक विचारों से स्वतः ही उसके वीर्य का प्रभाव होना ही स्वप्नदोष कहलाता है। स्वप्नदोष का मुख्य कारण है गंदे एवं कामोत्तेजक विचारों का स्मरण करना अतः इस रोग को पूर्णता खत्म करने के लिए किसी औषधीय से ज्यादा जरूरी है स्वतः ही अपने विचारों एवं कामुक प्रवृत्ति पर अंकुश व संयम लगाएं क्योंकि इस की परम आवश्यकता है। प्राचीन भारत में विवाह से पहले 25 साल की आयु तक के काल को ब्रम्हचर्य आश्रम का नाम देकर ब्रह्मचर्य पालन को विशेष महत्व दिया था और विवाह के बाद गृहस्थ आश्रम मैं भी संतान की आवश्यकता ना होने पर बिना किसी कारण वीर्य नाश को अनुचित ठहराया गया था। आज के बदलते युग में मनुष्य के मन की चंचलता और कामुक प्रवृत्ति पर नियंत्रण आवश्यक है। अतः स्वप्नदोष से बचने के लिए सबसे पहले कामुक विचारों तथा गलत आदतों द्वारा होने वाले वीर्यनाश की रोकथाम अति आवश्यक है।

2. मनुष्य को अपने विचारों को पवित्र रखने के साथ ही प्याज, बैंगन, उड़द की दाल, रबड़ी, खोया, बासी, तेल, गरिष्ट, खट्टे, चटपटे, पदार्थ चाय- कॉफी धूम्रपान शराब व नशीले पदार्थ, मांस, अंडे, मछली, कामोत्तेजक संगीत, और अश्लील फिल्में, कामुक चिंतन, पठन आदि उत्तेजक आहार विहार से बचें।

3. सोने से पूर्व अपने इष्ट देवता को देवता का चिंतन सत्साहित्य का पठन करें।

4. सोने से दो-तीन घंटे पूर्व रात का भोजन कर लें स्वभाविक भूख से कम खाएं सादा हल्का सुपाच्य भोजन लें।

5. सोने से तुरंत पहले  दूध या दूध से बने पदार्थो के सेवन से बचें।

6. रात को सोने से पहले ठंडे पानी से हाथ पांव धोकर सोएं तथा मूत्रेंद्रिय को भी रोजाना ठंडे पानी से साफ करें।

7. सोने से पहले मूत्रत्याग करें और रात को मूत्र त्याग की इच्छा होने पर आलस्य ना करें।

8. रात को चित्त होकर (पीठ के बल) सोएं तथा पेट के बल होकर ना सोएं।

9. कब्ज ना होने दें। कब्ज होने पर गुलकंद, त्रिफला या ईसबगोल की भुसी में से किसी एक का ही प्रयोग करें।

सहायक उपचार : भुजंगासन, सर्वागासन, वज्रासन, सिद्धासन, पद्मासन, सूर्य नमस्कार। किसी योग्य शिक्षक से अच्छी तरह सीख कर नित्य प्रातः नियम के साथ करें।