Ayurvedic Treatment of Jaundice, within 7 days Symptoms and Diet In Hindi sagarvansi ayurveda

मात्र 7 दिनों में पीलिया का चमत्कारी आयुर्वेदिक उपचार, कारण व पथ्य-अपथ्य / Ayurvedic Treatment of Jaundice, within 7 days Symptoms and Diet In Hindi

पीलिया (JAUNDICE) की पहचान, लक्षण और उपचार

 

जिस  व्यक्ति की आँखें, नख, मुँह, त्वचा आदी हल्दी की तरह पीले हो जाएं, मूत्र पीले रंग का आए शरीर में शिथिलता और कमजोरी अधिक प्रतीत हो दाह अन्न से अरुचि आदि से जो विशेषतया पीड़ित हो तो समझ लें कि उसे पीलिया हो गया है पीलिया में मंद ज्वर 99 से 100 तक रहता है। नाड़ी मंद और क्षीण हो जाती है यह रोग पित्त की अधिकता से होता है। (बाहरी कारणों में दूषित पानी एवं खाद्य पदार्थों के सेवन से भी होता है) और रोगी के मल का रंग सफेद या पीला होता है। भूख नहीं लगना, मुँह का स्वाद कड़वा या बेस्वाद रहना, मुँह सुखना, मिचली, पेट फूलना, गैस बनना, कई बार शरीर में खुजली होना, हाथ पैरों का टूटना, ज्वर-भाव के साथ दिन प्रतिदिन कमजोरी बढ़ती जाती है। जीर्ण पीलिया में चक्कर, भयानक खुजली विशेषकर रात में, सिर दर्द, स्मृतिहीनता, उत्साह नाश, नींद में कमी, पित्त खून में मिलकर में मिलकर रक्त को विषाक्त करना यकृत और प्लीहा का बढ़ना व कड़ा पड़ जाना आदि उल्लेखनीय है।

 

पीलिया में पथ्य-अपथ्य :-

परहेज एवं अपथ्य - घी, तेल, हल्दी, लाल मिर्च, और गरम मसालों से बनी चीजें, अचार, संपूर्ण खट्टे पदार्थ ना खाएं, थोड़ी मात्रा में गाय का मक्खन लिया जा सकता है। राई, हींग, गुड, बेसन, कचालू, अरबी न लें। चने और उड़द की दाल, उड़द और मैदे के भोज्य पदार्थ, केक, तले हुए पदार्थ, पित्त पैदा करने वाली और जलन करने वाली चीजों का सेवन बंद कर दें। धूप में घूमना, आग के पास बैठना, परिश्रम के काम करना, अधिक पैदल चलना और क्रोध, तनाव, संभोग आदि से बचें धूम्रपान, शराब, मांस, मछली, चाय, एवं मादक पदार्थों का सेवन ना करें अशुद्ध पानी और अशुद्ध बासी से खाद्य पदार्थों का प्रयोग ना करें।

 

पथ्य - पीलिया में गन्ने का रस लेना सर्वोत्तम है बशर्ते कि रस अच्छे और साफ गन्ने का स्वच्छता से बनाया हुआ हो। प्रातः गन्ने या नारंगी का रस लिया जा सकता है। संतरे का रस, कच्चे नारियल या डाभ का पानी, जौ का पानी, बेदाना (मीठा अनार) का रस, मूली के पत्तों का रस, फटे दूध का पानी, दही का तोड़, काली मिर्च व जरा नमक मिलाकर पतली छाछ पीना हितकारी है। दूध यदि लें तो दूध में बराबर पानी मिलाकर और कुछ दाने सौंफ के डालकर अथवा 1-2 दाने छोटी पीपर डालकर अथवा 1 ग्राम सोंठ का चूर्ण मिलाकर लोहे की कढ़ाई में गरम किया हुआ दूध अच्छा रहता है। शाक परवल, चौलाई, जिया, लौकी, तोरई, पालक, पुदीना, धनिया, आंवला, टमाटर, लहसुन आदि  फल मीठा अनार (बेदाना), मीठा संतरा, अंगूर (अंगूर के स्थान पर 8-10 मुनक्का दाने या किशमिश 20-25 दानों को शाम को पानी में भिगोकर अगले दिन प्रातः मुनक्का के बीज निकाल कर या किशमिश को खाकर ऊपर से यही बचा हुआ पानी पी लेना चाहिए) आज कल अंगूर तथा कई फल बहुत ही जहरीले कृमिनाशक घोल में डूब जाते हैं अतः अंगूर आदि इन फलों को स्वच्छ पानी से कम से कम तीन बार अच्छी तरह धोने के बाद काम में लाएं मौसमी, पपीता, चीकू, खजूर, आदि फल भी पथ्य हैं। भोजन खाने में पुराने गेहूं और जौ की रोटी बिना घी की दें। चावल, खिचड़ी न दें। दलिया दे सकते हैं। पीलिया में जौ का सत्तू और ऊपर से गन्ने का रस पीना अधिक लाभदायक है। मूंग की दाल का पानी लें अथवा बिना मसाले की मूंग की दाल में काला नमक व काली मिर्च मिलाकर लें मूंग,मसूर,अरहर भी पथ्य हैं। पीलिया होते ही कम से कम 8 दिन तक खटाई, लाल मिर्च व मसाले वाली चीजों तथा चिकनाई युक्त आहार का त्याग करने से जल्दी लाभ होगा।

     उपचार

1. पीपल वृक्ष के 3-4 नए पत्ते कोंपलें पानी से साफ करके मिश्री या चीनी के साथ खरल (हमाम दस्ता) मैं खूब घोंटे या सिल पर बारीक पीस लें। एक गिलास लगभग 250 मिलीलीटर पानी में घोलकर किसी स्वच्छ कपड़े से छान लें यह पीपल के पत्तों का शरबत पीलिया ग्रस्त रोगी को दिन में दो बार पिलाएं आवश्यकता अनुसार 3 दिन से 7 दिन तक दें पीलिया से छुटकारा मिल जाएगा।

 

विशेष

 हल्का और सुपाच्य भोजन लें और पूर्ण विश्राम करें। स्वच्छ, शीतल, हवादार मकान में रहे। पीलिया में साधारण जुलाब लेकर औषधि-सेवन करना अच्छा रहता है जैसे - त्रिफला का जूस।

2. विकल्प एक गुलाबी (अथवा बढ़िया सफेद फिटकरी) फूली हुई पीसकर 1 / 8 ग्राम से आधा ग्राम(२ से 4 रत्ती) की मात्रा में गाय की छाछ (या दही) के साथ दिन में तीन बार पिलाने से पीलिया कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। आवश्यकतानुसार 3 से 7 दिन तक लें।

3. विकल्प मूली के पत्तों और टहनियों का रस 50 ग्राम में 10 ग्राम मिश्री मिलाकर प्रातः खाली पेटपीने से सब प्रकार के पीलिया में लाभ होता है और इससे 1 सप्ताह के भीतर पीलिया रोग दूर हो जाता है।