Easy home remedies for all diseases related to liver in hindi sagarvansi ayurveda

जिगर, कलेजा व यकृत जैसे नामों वाले लिवर से जुड़ी सभी बीमारियों के आसान से घरेलू उपचार / Easy home remedies for all diseases related to liver in hindi

लिवर की अनेक परेशानियां (लिवर की सूजन, लिवर में संकुचन इत्यादि)

दुनिया भर में लिवर के मरीजों की संख्या एक बहुत बड़ी तादाद में हैं कुछ लोगों को अपनी लिवर की समस्या के बारे में पता रहता है या पता चल जाता है और वह समय रहते उपचार भी शुरू करा देते हैं परंतु कुछ लोग अपनी लिवर की समस्या से अवगत नहीं हो पाते हैं और इस वजह से धीरे धीरे वह अपने जीवन से हाथ धो बैठते हैं और जैसा कि हम सभी जानते हैं कि एलोपैथी द्वारा लिवर का इलाज अत्यधिक महंगा होता है और कई लोग तो इस तरह  के होते हैं जो लिवर का इतना महंगा इलाज नहीं करवा सकते। लिवर मानव शरीर का बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है। लिवर को जिगर, कलेजा यकृत भी कहते हैं या कहें कि लिवर को इन नामों से भी जाना जाता है। लिवर पूरे शरीर में सभी अंगों के लिए कुछ ना कुछ कार्य जरूर करता है। अर्थात लिवर एक ऐसी ग्रंथि है जोशरीर में कई सारे कार्य करती है लिवर के कुछ मुख्य कार्य यह भी हैं :- लिवर का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है मानव द्वारा खाए गए भोजन को पचाना, मानव शरीर में उपस्थित विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालना, मानव शरीर के लिए ऊर्जा प्रदान करना एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर व मजबूत बनाए रखने के लिए भी लिवर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उपरोक्त लिवर के कार्यों से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि लिवर कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसमें यदि आपका लिवर ठीक प्रकार से कार्य कर रहा है तब तो ठीक है परंतु यदि लिवर उचित प्रकार से कार्य नहीं कर रहा तो आपके अपने अत्यधिक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य के लिए सचेत होने की आवश्यकता है। जिसे जरा सा भी अनदेखा करना बहुत बड़ी समस्या को बुलावा देना है जो कि बिल्कुल भी अच्छा नहीं है।

लिवर के खराब होने के कारण

1.  मदिरा या शराब के अधिक सेवन करने से लिवर खराब हो जाता है।

2.  सामान्य से अधिक तेल या चिकनाई का सेवन करते रहने से भी लिवर काफी बुरी तरह प्रभावित होता है।

3.  अधिक पुरानी कब्ज होने से भी लिवर पर काफी गहरा असर पड़ता है।

4.  किसी प्रकार की नकली दवा या बहुत समय से एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग करने से लिवर पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।

लिवर के रोग होने के लक्षण या संकेत

1.  आंखों के नीचे या आंखों के आसपास चारों ओर काले घेरे हो जाना लिवर की खराबी के संकेत हो सकते हैं।

2.  काफी समय से पाचन तंत्र का बिगड़ा होना भी लिवर की समस्या को दर्शाता है क्योंकि लिवर का एक महत्वपूर्ण या मुख्य कार्य खाए गए भोजन को पचाना होता है।

3.  मुख से हमेशा दुर्गंध आना लिवर की खराबी का बड़ा संकेत हो सकता है। लिवर की खराबी के कारण मुंह में अमोनिया अधिक रिसता है। जिससे मुंह में दुर्गंध आती है।

4. मल या मूत्र  हमेशा गहरे रंग का होना भी लिवर खराब होने का संकेत हो सकता है।

5. आंखों का सफेद भाग व हाथ और पैर के नाखूनों का पीला पड़ना भी लिवर की खराबी को दर्शाता है। आम भाषा में इस समस्या को पीलिया व जॉन्डिस भी कहते हैं। पीलिया व जॉन्डिस का उपचार आप हमारे इसी वेबसाइट मैं पढ़ सकते हैं।

 

1. उपचार

अच्छी तरह पका हुआ एक कागजी नींबू लेकर उसको बीच से दो भाग कर ले फिर आधे भाग को अलग रख दें और आधे भाग के बीज निकालकर चार भाग कर ले परंतु ध्यान रहे के चारों भाग के टुकड़े आपस में जुड़े रहे अर्थात अलग अलग ना हो। तत्पश्चात एक भाग में बारीक पिसी काली मिर्च का चूर्ण लगा दें,  दूसरे भाग में पिसा काला नमक या सेंधा नमक लगा दें, तीसरे भाग में सोंठ का चूर्ण लगा दें और चौथे भाग में मिश्री या चीनी लगा दें। इस क्रिया के बाद नींबू को रात भर के लिए ढक कर रख दें।  अगले दिन प्रातः भोजन करने से लगभग एक घंटा पहले उस नींबू को मंदी आंच पर गर्म तवे पर गर्म करके चूस लें।

विशेष :-           

1.  इस प्रयोग को आवश्यकतानुसार लगभग 7 से 21 दिनों तक करने से लिवर सही होगा।

2.  इस प्रयोग से यकृत विकार तो ठीक होते ही हैं साथ में पेट में दर्द और मुंह का स्वाद भी ठीक हो जाता है।

3. यह प्रयोग यकृत या लिवर के कठोर और छोटा होने की समस्याओं के लिए अचूक उपाय है।

 

2. उपचार

लिवर को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन सी की आवश्यकता होती है और हम सभी जानते हैं की आंवला में विटामिन सी की भरपूर मात्रा होती है और कई सारे अध्ययनों से यह साबित हुआ है कि आंवला में लिवर को स्वस्थ रखने के व सुरक्षित रखने के कई सारे गुण मौजूद होते हैं। यदि किसी को लिवर की समस्या है तो उसे 1 दिन में 3 से 4 कच्चे आंवले का रस पीना चाहिए या 5 ग्राम की मात्रा में आंवले का चूर्ण भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

सहायक उपचार (उपचार के साथ-साथ कुछ ध्यान देने वाले तथ्य)

उपचार के दौरान चीनी अथवा मीठे का प्रयोग ना करें। यदि दूध पीने की इच्छा करें तो चीनी की जगह 5 - 7 मुनक्का डालकर मीठा कर लें। हो सके तो उपचार के दौरान रोटी का सेवन भी ना करें इसके अलावा सब्जियां और फल से ही गुजारा करें सब्जी में मसाला ना डालें टमाटर, पालक, गाजर, करेला, बथुआ, लौकी आदि सब्जियों का इस्तेमाल करें और फलों में आंवला, पपीता, सेब, आलूबुखारा, जामुन, लीची आदि इस्तेमाल कर सकते हैं। घी तथा चिकनाईयुक्त खाने का इस्तेमाल ना करें। छाछ का इस्तेमाल कर सकते हैं।