bavaaseer ya piles ka ghareloo ilaaj Home remedies for hemorrhoids sagarvansi ayurveda

बवासीर की सबसे सस्ती, सिद्ध और कारगर औषधि / bavaaseer ya piles ka ghareloo ilaaj Home remedies for hemorrhoids

बवासीर की समस्या (Piles)

बवासीर की व्याख्या

बवासीर को अन्य भाषा में पाइल्स भी कहा जाता है। बवासीर एक ऐसी कष्टदायक समस्या है जिसमें मनुष्य के मल त्याग के वक्त गहरा लाल खून का स्त्राव मल के साथ होने लगता है या मल त्याग के समय में मल त्यागने में अधिक कष्ट या पीड़ा होती है। इस समस्या में मल त्याग के समय खून या तेज दर्द महसूस होता है। ऐसी स्थिति में मनुष्य का ठीक तरह से पेट साफ नहीं हो पाता और इसी कारण से मनुष्य की खाने के प्रति अरुचि रहती है। पाइल्स में मल त्याग के समय खून या तेज दर्द होने का कारण यह है कि इस परेशानी में मल - मार्ग में या मल के निकास द्वार पर मस्से जैसे उत्पन्न हो जाते हैं और मल मार्ग में और मल के निकास द्वार के आसपास सूजन जाती है जिससे मल त्यागते समय थोड़ा भी खुश्क होने पर मल के नीचे की ओर खिसकने से उत्पन्न मस्सों पर घिसाव पढ़ने से खूनी बवासीर में रक्त स्राव होने लगता है और बादी बवासीर में तेज दर्द महसूस होता है। खूनी बवासीर में रक्त स्राव होने की वजह से मनुष्य को कमजोरी भी महसूस होने लगती है। आज के समय में मानव जीवन की इस तेज भागा-भागी में और भोजन के प्रति स्वच्छन्दता तीखा, तेज मसालेदार, चटपटा, चिकनाई युक्त पदार्थ, गरिष्ठ भोज्य पदार्थ,मांसाहार के प्रती अधिक रुची यही सब  वजह हैं  जिनके कारण बवासीर या पाइल्स उत्पन्न हो जाती है। पाइल्स काफी आम समस्याओं में से एक है। यह करीब 70 से 75 फीसदी को एक - एक समय हो ही जाती है परंतु अगर उस समय पर मनुष्य अपने खानपान पर ध्यान दें तो यह समस्या से बहुत जल्दी निजात पा सकता है। अगर पाइल्स के शुरुआती समय पर उस पर ध्यान ना दिया गया और बदपरहेजी की जाए तो यह उग्र रुप ले लेती है और तमाम तरह की परेशानियां उत्पन्न कर देती है। यदि परिवार में किसी को यह समस्या कभी रही हो तो यह समस्या होने के आसार और भी बढ़ जाते हैं या कहें कि यह समस्या अनुवांशिक है।

                                             

पाइल्स के लक्षण

1.  मल त्यागते वक्त गहरा लाल रक्त का मल मार्ग से स्त्राव होना इस समस्या का सबसे बड़ा लक्षण है।

2.  पाइल्स में मल निकास के आस-पास गांठ जैसी महसूस हो सकती है इस गांठ में खून होने की वजह से मल त्यागने में अधिक कष्ट या पीड़ा महसूस होती है।

3.  मल त्याग के बाद भी पेट ठीक से साफ ना हुआ हो ऐसा महसूस होना भी इस समस्या का मुख्य लक्षण है।

4. मल के निकास द्वार (ऐनस) के आसपास खुजली महसूस होना और सूजन आ जाना। 5. मल त्यागते में म्यूकस जैसा लिस लिसा पदार्थ आना और इसके साथ-साथ तेज दर्द भी महसूस होना। उपचार सूखे हुए नारियल के बुरे रेशे (नारियल की जटा) को नारियल से अलग कर एक साफ पात्र में जलाने पर उसकी राख प्राप्त होगी जिसको जटा भस्म कहा जाता है। प्राप्त भस्म को छानकर रख लें और एक छोटा चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार खाली पेट या रोज सुबह खाली पेट 3 दिन तक 100 मिलीलीटर या करीब 1 से डेढ़ कप ताजा छाछ या 100 ग्राम ताजा दही (ध्यान रहे छाछ या दही जो भी लिया जाए वह खट्टा ना हो इस बात का विशेष ध्यान देना आवश्यक है) के साथ लेने से आश्चर्यजनक लाभ मिलेगा इस प्रक्रिया से पीड़ित दोनों प्रकार की समस्या का निदान हो जाएगा और दोबारा शायद ही औषधि का सेवन करने की आवश्यकता महसूस हो यदि हो तो और मात्रा में भी ली जा सकती है।

 

विशेष

1. किसी भी व्यक्ति का कैसा भी बवासीर हो चाहे वह खूनी बवासीर हो या चाहे बादी बवासीर हो और चाहे काफी पुराना बवासीर भी क्यों ना हो इस औषधि के सेवन से हर प्रकार का भयंकर से भयंकर बवासीर ठीक हो जाता है परंतु आहार-विहार शुद्ध व अनुत्तेजक रहें तो यह रोग दोबारा नहीं होगा।

2. उपरोक्त औषधि से बवासीर के अतिरिक्त महिलाओं में पाए जाने वाली समस्या "प्रदर" चाहे कैसा भी हो श्बेत हो या फिर रंगीन प्रदर हो।इस औषधि से यह रोग भी समान रूप से लाभकारी सिद्ध होगा। यदि प्रदर रोग की रोगिणी थोड़े दिन तक अपनी क्षमता से अधिक कार्य या कोई कष्टदायक कार्य करने से बचें जैसे दौड़ना, लंबी - पैदल यात्रा करना, तेजी से चलना, कोई भारी सामान उठाना, तेज मिर्च मसालेदार, चटपटा, खट्टा और उत्तेजक पदार्थों से बचें।

3. इन रोगों के अलावा हैजा वमन और हिचकी रोग में भी सिद्ध औषधि है 1 ग्राम की मात्रा में एक घूंट ताजे पानी से लें।

4. शरीर के किसी प्रकार के अंदर या बाहर के अंगों से कैसा भी रक्तस्राव हो या खून थूक के रूप में आना, खूनी दस्त आदि बीमारियों में यह काफी लाभदायक औषधि है।

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