Ayurvedic treatment to get rid of stubborn skin diseases such as psoriasis sagarvansi ayurveda

सोरायसिस जैसा जिद्दी चर्म रोग से छुटकारा पाने का आयुर्वेदिक उपचार / Ayurvedic treatment to get rid of stubborn skin diseases such as psoriasis

सोरायसिस  (Psoriasis)

सोरायसिस एक तरह का जिद्दी चरणों में चर्म रोग है जो शरीर की  त्वचा की  ऊपरी सतह पर होती है। सोरायसिस रोग कई कारणों से होता है परंतु सोरायसिस होने का मुख्य कारण है इसके वंशानुगत समस्या का होना है। सोरायसिस एक तरह का पैत्रिक रोग है। सोरायसिस त्वचा पर होने वाली एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर की त्वचा पर एक मोटी सतह उभर आती है। या कहे कि सोरायसिस की समस्या में सतह की खाल बहुत अधिक बनना शुरू हो जाती है। इसके अतिरिक्त इस समस्या में शरीर की त्वचा पर लाल रंग की उभरी हुई सतह हो जाती है। सोरायसिस का दूसरा नाम छालरोग भी है यह छालरोग से भी जाना जाता हे। सोरायसिस  अधिकतर हाथ की हथेलियों, कोहनियों, घुटनों, सिर के ऊपरी सतह (बालों के जड़ों में), पैर के तलवों में पीठ पर यह समस्या अधिक होती है। इस समस्या में मानव शरीर पर अत्यधिक खुजली होती है और त्वचा पर लाल दाग या चकत्ते पड़ जाते हैं। यह रोग वंशानुगत तो होता ही है इसके साथ ही इस समस्या के होने का कारण पर्यावरण भी है। इस समस्या या बीमारी से पीड़ित लोगों की संख्या दुनिया भर में लगभग 1% लोगों को है। सोरायसिस का आयुर्वेद में इलाज संभव है।

 

 सोरायसिस होने के कारण

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हमारे मानव शरीर में कई प्रकार के बदलाव होते हैं जो कई तो साधारण होते हैं और कई असाधारण परंतु हम साधारण और असाधारण दोनों को ही नजर अंदाज कर देते हैं जिसकी वजह से साधारण बदलाव में तो कोई दिक्कत नहीं होती परंतु असाधारण बदलाव को नजरअंदाज करना ही हमारी सबसे बड़ी भूल होती है। साधारण बदलाव होते हैं जैसे नाखून का बढ़ना बालों का बढ़ना इत्यादि इसी तरह से असाधारण बदलाव में सोरायसिस जैसी बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं। जब मानव शरीर में नई त्वचा का निर्माण होता है उस समय शरीर के किसी भी हिस्से की नई त्वचा को आने में 4 से 5 दिन का समय लगता है। या कहें कि 4 से 5 दिन के समय में ही पुरानी से नई त्वचा में बदल जाती है और सोरायसिस के समय त्वचा इतनी कमजोर व पतली पड़ जाती है कि यह पूरी बनने से पहले ही खराब हो जाती है इस कारण से सोरायसिस की जगह पर लाल चकत्ते पड़ जाते हैं और  भीषण खुजली होने लगती है।

 

सोरायसिस की बीमारी के कारण

1.  त्वचा पर मॉश्चराइजर ना लगाना।

2.  तेज धूप में लगातार बाहर रहना।

3.  त्वचा को पर्याप्त मात्रा में चिकनाहट या नमी की कमी के कारण।

4. सुबह की हल्की हल्की धूप का से सेक ना कर पाना।

5.  त्वचा का ख्याल ना रखना।

6.  पैतृक रोग होने के कारण।

इत्यादि कारणों से सोरायसिस की समस्या उत्पन्न हो जाती है।

 

उपचार

1. पंचनिकृ घृत गु. 6 माशे से 1 तोला शुष्म दूध के साथ सेवन करने से अपरस, फोड़ा, फुंसी, चकता, खाज - खुजली, किसी भी तरह के नए पुराने घाव अस्थि - क्षय है आदि ठीक हो जाते हैं।

2. चर्म रोग नाशक मल्हम (वैधनाथ) समस्त प्रकार के चर्म रोग में लाभदायक है जैसे खाज - खुजली, अपरस, भगंदर, दाद, नासूर आदि। मरहम को नित्य दिन में दो तीन बार लगाएं।

3.  गंधक रसायन 4 से 9 रत्ती महामज्जिष्ठादि काढ़ा या खदिर खदिराष्टि के साथ सुबह-शाम सेवन करने से रक्त की शुद्धि हो जाती है एवं सब तरह के चर्म रोग ठीक हो जाते हैं।

4. उस्वा अर्क 2 से 5 तोला सुबह शाम सेवन करने से रक्त शुद्ध हो जाता है एवं किसी भी तरह के चर्म रोग इससे नहीं बच पाते।

5. पित्त पापड़ा (शहतरा) 5 से 10 तोले अर्क दिन - रात या सुबह शाम सेवन करने से रक्त का शोधन एवं चर्म रोग से मुक्ति मिलती है।

6. मूल औषधि के साथ-साथ त्रिफला काढ़ा 2 से 9 तोला दिन - रात में 4 बार अवश्य सेवन करें यह रक्तशोधक है जिससे समस्त प्रकार के त्वचा रोगों का नाश होता है।

 

नोट: किसी भी समस्या का उपचार किसी प्रशिक्षित आयुर्वेदिक डॉक्टर की निगरानी में ही करें।