Home remedy to get Fair Complexion, Dark Circle, Oily Skin, Dry Skin

केवल 15 दिन में उबटन से निखारें अपना गोरा रंग एवं सौंदर्य

महंगी और कृत्रिम सौंदर्य प्रसाधनों के स्थान पर यदि हम स्वदेशी एवं प्राकृतिक सौंदर्यवर्धक पदार्थ का उपयोग करें तो हमें अधिक और स्थाई लाभ होगा। सौंदर्यवर्धक स्वदेशी उपचारों का मुकाबला जोर शोर से विज्ञापित किए जाने वाले आधुनिक सौंदर्य प्रसाधन महंगे होते हुए भी नहीं कर सकते। पाठकों की सेवा में प्रस्तुत है स्वदेशी सौंदर्यवर्धक प्रयोग।

त्वचा का सौंदर्य 
चिकनी एवं तैलीय त्वचा के लिए गुणकारी बेसन हल्दी का उबटन :
- 60 ग्राम (लगभग 12 चम्मच) बेसन और आधा चम्मच पिसी हुई हल्दी मैं थोड़ा कच्चा दूध (या पानी) मिलाकर गाढ़ा गाढ़ा घोल बना लें और चौथाई चम्मच या 8-10 बूंद सरसों या (तिल या जैतून) का तेल मिलाकर इतना फेंटे कि गाढा़ लेप बन जाए इस उबटन को चेहरे, गर्दन, बांहें, हाथ-पैर, कोहनियों, घुटनों आदि अंगों पर लेप कर लें। लेप करने के 10 से 15 मिनट बाद जब यह लेप सूखने लगे तो हथेलियों के दबाव से मसल-मसल कर छुड़ा लें। उबटन मैल के साथ बत्तियों के रूप में छूट जाएगा। अब थोड़ी देर बाद गुनगुने पानी से अंगों को धो डालें या स्नान कर ले और तौलिए से सुखा लें। इससे त्वचा साफरेशम सी मुलायम और चमकदार हो जाएगी और चेहरे की रंगत निखर उठेगी बेसन और हल्दी के इस उबटन को चेहरे पर लगाने से चेहरे की झाइयां, दाग, झुर्रियां, और कालिमा दूर होती है और चेहरे के अनावश्यक बाल झड़ जाते हैं। 

विशेष 
1. उबटन स्नान से आधे घंटे पहले करना अच्छा रहता है या फिर रात्रि सोने से पहले।
2. इसे दो-तीन दिन लगातार करने के पश्चात हर दूसरे तीसरे दिन में एक बार और फिर महीने में 4 बार अवश्य करना चाहिए शीतकाल में सुविधानुसार 2 सप्ताह में एक बार तो करना ही चाहिए।  इसके छः - सात बार प्रयोग के बाद आपको अपने रंग में अंतर जान पड़ेगा। साबुन की जगह उबटन लगाकर स्नान करने से त्वचा में निखार आता है और वर्ण उज्जवल(Fair Complexion) होता है।
3. उबटन करते समय गर्दन को ना भूलें।
4. उबटन भौंहों, पलकों एवं होठों पर ना लगाएं।
5. तैलीय त्वचा के लिए बेसन (घर का पिसा हुआ बढ़िया रहता है) से बढ़कर उत्तम कोई अन्य चीज नहीं है। केवल बेसन को ही पानी में घोल कर लेप कर लें और 15 मिनट बाद धो डालें इससे चेहरे का चिपचिपापन दूर होगा चेहरा खिल उठेगा। बेसन का लेप चेहरे को इतना मुलायम बनाएगा कि मक्खन भी क्या। गर्मियों में खाली बेसन ही मलना अच्छा रहता है। यह ठंडक और शांति प्रदान करता है। ध्यान रहे कि गर्मियों में तैलीय पदार्थों के अधिक प्रयोग ना करें अन्यथा तैलीय ग्रन्थियाँ अधिक सक्रिय हो उठेगी।
6. उवटन करते समय इस बात का ध्यान रहे कि हथेलियों को ऊपर से नीचे की दिशा में ना चलाएं अन्यथा चमड़ी ढीली पड़ सकती है। झुर्रियों से बचने के लिए मालिश हमेशा धीरे-धीरे नीचे से ऊपर की तरफ, ललाट पर ऊपर की ओर, गाल पर नीचे से कनपटी की तरफ, और नाक से कान की तरफ, थोड़ी पर बाएं से दाएं दिशा में तथा झुर्रियों के विपरीत दिशा में हथेलियों को ले जाते हुए करें। 

विकल्प:- एक कांच की कटोरी में सौ ग्राम कच्चे दूध में चौथाई नींबू निचोड़े या नींबू के रस की इतनी बूंदे डाले के दूध फट जाए फिर इसे चेहरे और हाथों पर धीरे-धीरे मलें। तदुपरांत गुनगुने पानी से स्नान करें या चेहरे को धो डालें। इससे त्वचा कोमल और कांतिमय हो जाएगी। 

विशेष 
1. यह तैलीय त्वचा को साफ करने वाला (Cleanser To Oil Skin) एक उत्तम मिश्रण है। नींबू का रस जहां त्वचा की अतिरिक्त चिकनाई को साफ करता है वहां दूध त्वचा को मखमली कोमलता प्रदान करता है।
2. यदि गर्दन मैली और आभाहीन हो गई हो तो इस मिश्रण को रूई, कपड़े या स्पंज की सहायता से गर्दन पर धीरे-धीरे मलें और फिर सूखने दें 20 मिनट बाद ठंडे पानी से धोकर पोंछकर सुखा लें गर्दन स्वच्छ मुलायम और कांतिमय हो जाएगी।
3. यदि अधिक देर धूप में रहने के कारण चेहरा मुरझा गया हो अथवा चेहरे का रंग पीला पड़ गया हो तो चेहरे को धोने के बाद नींबू की बूंदें मिला हुआ दूध को रुई या ऊन के फाहे से चेहरे पर चुपड़ लें। चेहरा खिल उठेगा इससे कील- मुंहासे दूर होकर त्वचा साफ और कांतियुक्त हो जाएगी।

विकल्प 2:- तैलीय त्वचा के लिए खीरे का घोल किसी कांच के बर्तन में खीरे को कद्दूकस कर उसको कपड़े में अच्छी तरह निचोड़कर रस निकाल लें और 30 ग्राम रस में आधा चम्मच नींबू का रस व आधा चम्मच गुलाबजल मिलाकर घोल बना लें। इसे रूई से चेहरे व गर्दन पर लगाकर आधा - घंटा बाद पहले गुनगुने और फिर सादे पानी से मुंह धो लें। इससे चेहरे पर कुदरती चमक और निखार आता है क्योंकि बनावटी क्रीमों की तुलना में खीरे का रस बहुत शीघ्र त्वचा के भीतर पहुंचकर असर करता है। खीरे में त्वचा को निखारने का विशिष्ट गुण हैं। धूप के कारण सांवली पड़ गई त्वचा पर इस घोल का उपयोग लाभप्रद है।

विशेष 
1. केवल खीरे के रस या खीरे के टुकड़ों को अकेले ही चेहरे पर मलने से रंग साफ होता है और तैलीय त्वचा की शिकायतें दूर होती हैं। ज्यादा चिकनाई वाले चेहरे पर पिसा हुआ खीरा मल कर धोने से अनावश्यक चिकनाई दूर हो जाती है।
2. आंखों के नीचे व आसपास पड़ गए काले पन को दूर करने के लिए रुई के फाहे को खीरे के रस में भिगोकर पलकों पर व उसके आस पास रखें 10-15 मिनट बाद हटा लें। धीरे-धीरे तो त्वचा स्वभाविक रंग में आ जाएगी।
3. खीरे का टुकड़ा काटकर त्वचा पर कुछ देर रगड़े जिससे की त्वचा पर रस की एक परत सी चढ़ जाए 20 मिनट बाद त्वचा को सादे पानी से धो लें। ऐसा करते रहने से दाग धब्बे मुंहासे आदि धीरे-धीरे नष्ट हो जाते हैं।

अत्यधिक तैलीय त्वचा 
यदि त्वचा इतनी तैलीय हो कि मेकअप भी नहीं ठहरता हो तो बर्फ का टुकड़ा दूध में भिगोकर चेहरे पर  धीरे-धीरे मले (मसाज करें)। इस क्रिया से त्वचा का चिकनापन दूर होगा चेहरे पर ताजगी का अनुभव होगा।

शुष्क और रूखी त्वचा 
आधी कटोरी कच्चा या गुनगुना दूध में एक स्वच्छ रूई का टुकड़ा भिगोकर चेहरे, गर्दन, हाथों आदि शरीर के अन्य अंगों पर 5-10 मिनट तक नरमी से फेरिये। आप देखेंगे कि रुई कितनी मैली हो गई है। 20 मिनट बाद ठंडे या गुनगुने पानी से धो डालें दुग्ध स्नान से त्वचा को स्निग्ध बनती है। दूध के दैनिक प्रयोग से मुंहासे, चेहरे की झाइयां, दाग-धब्बे, झुर्रियां और खुरदरापन अदि दूर होकर मुख मंडल की शोभा और कांति बढ़ती है तथा रंग निखरता है। 

विशेष 
1.  दुग्ध स्नान मैं बहुत अधिक दूध की आवश्यकता नहीं होती परंतु थोड़े से दूध के प्रयोग से त्वचा दूधिया और अत्यंत कोमल बनती हैं। चेहरे के दाग-धब्बे मिटाने और त्वचा को आकर्षक रूप प्रदान करने के लिए गुनगुने दूध से बेहतर कोई दूसरी दवा नहीं है।
2. कच्चे दूध अथवा दूध के झाग रुई में लगाकर चेहरे पर मलने और 20 मिनट बाद ताजे पानी से चेहरा धोने से चेहरा चिकना हो जाता है और एक अनुपम कांति मुखड़े पर छा जाती है। शीत ऋतु में त्वचा की शुष्की मिटाने के लिए गुनगुना दूध लेकर उसे रुई या ऊन के फाहे की सहायता से चेहरे और हाथों पर धीरे-धीरे मलें और कुछ देर पश्चात हल्के गर्म पानी से धो डालें। त्वचा स्निग्ध और कोमल होगी।

विकल्प 
60 ग्राम गेहूँ या जौ के छने हुए आटे में चौथाई चम्मच, हल्दी का बारीक चूर्ण, एक चम्मच तिल या सरसों का तेल अथवा पिघला हुआ देशी घी और आवश्यकतानुसार पानी मिलाकर गाढ़ा उबटन तैयार कर लें। नहाने से पहले इसे चेहरे व शरीर पर लगाएं थोड़ा सूखने पर या 10 मिनट बाद हथेली से रगड़ कर उतार लें। आप देखेंगे कि उतारे उबटन में शरीर की मैल भी उतर गई है। उबटन जब  छूट जाए तब आधे घंटे बाद गुनगुने पानी से स्नान कर लें। शीतकाल में चेहरे पर उतपन्न खुश्की को दूर करने के लिए है यह उत्तम उबटन है। इस उबटन के प्रयोग से त्वचा मुलायम गोरी स्निग्ध एवं लोमरहित होती है।

विशेष:
1.उबटन हर तीसरे-चौथे दिन किया जा सकता है।
2. सुगंध के लिए इस उबटन में चंदन पानी में घिसकर भी मिला सकते हैं।
3. स्नान करते समय साबुन ना लगाएं हो सके तो उबटन के बाद साबुन के स्थान पर बेसन (एक भाग) और दूध (दो भाग) मिलाया हुआ घोल लगाकर नहाएं ताकि उबटन से प्राप्त चिकनाहट त्वचा में रहे। 

विकल्प एक चम्मच दूध की ठंडी मलाई व एक चुटकी हल्दी का बारीक चूर्ण मिलाकर चेहरे पर नित्य मलें तो त्वचा का रूखापन दूर होकर चेहरा कांतिवान हो जाता है।