this is how to get releif from burns and burn marks in hindi

आग से जलने पर हो रही जलन को भूल जाएंगे इस घरेलू नुस्खे से

जलना (BURNING)

सामान्यतः जलने की घटनाएं आम जीवन में अक्सर सुनने को मिलती हैं। कभी ना कभी जाने अनजाने में जलने के अनुभव से लगभग सभी लोग गुजरते हैं। जिसमें जलने की वजह या कारण आग, गर्म वस्तु को छूना, गर्म तरल पदार्थ का त्वचा के संपर्क में आना या त्वचा पर गिरना आदि हो सकते हैं। कम उम्र में असावधानी के कारण अक्सर जल जाने की घटना हो जाती है। महिलाओं को रसोई में काम करते वक्त छोटी-मोटी जलने की चोट भी लगती रहती हैं। यह एक सामान्य घटना मूल पीड़ा है। यह किसी भी समय शरीर के किसी भी भाग पर हो सकती है। कभी-कभी तो बड़े-बड़े फफोले भी उठ आते हैं जिन को फोड़ना या फूट जाना एक लंबे समय के लिए पीड़ा मोल लेना होता है। इस प्रयोग से फफोले ना फूटते हैं, ना बढ़ते हैं, अपितू बैठ जाते हैं। सबसे बढ़कर विशेषता यह है कि फफोलों के फूट जाने पर वहां किसी प्रकार का निशान भी नहीं बनता, यदि इसको निरंतर प्रयोग में लिया जाए।

 

समस्या का उपाय

 1. मकान पोतने कि कलइ के टाँटे (stone pieces) लीजिए उन्हें एक मिट्टी के कोरे कलश (मटका) में आवश्यकतानुसार पानी डालकर रख दीजिए पानी में कलइ के टाँटे घुलकर  गल जाएंगे सारे टाँटे गलकर नीचे बैठ जाएंगे और ऊपर पानी निथर आएगा। इस समय पानी का रंग कुछ-कुछ दूधिया हो जाएगा। यदि सर्दी हो तो तिल्ली का तेल और यदि गर्मी है तो सरसों का शुद्ध तेल उतना ही लें जितना पानी लिया हो। कलइ भिगोये हुए पात्र में से पानी निकाल कर एक अलग स्वच्छ बोतल में भरकर रख लें। इसमें ऋतु के अनुसार तेल मिला दें 20 से 25 मिनट बाद बोतल को जोर से हिलाए। जिससे पानी और तेल आपस में मिल जाए दोनों का मिश्रण कुछ पीलापन लिए घोल सा बन जाएगा। बस दवा तैयार है। मोर पंख से जले हुए स्थान पर दिन में पांच-सात बार लगाइए मोरपंख ना हो तो 1 सींक में रुई लगा कर भी प्रयोग किया जा सकता है। वर्षा ऋतु में दोनों में से कोई भी तेल काम में लिया जा सकता है। यह प्रयोग अनुभूत है और बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ है। इस पर रूई आदि लगाकर पट्टी लगाना निषिध्द है।

 

2. आग से जले स्थान पर तुरंत ही निथरा हुआ चूने का पानी और नारियल के तेल दोनों की बराबर मात्रा में मिलाकर घोल बनाकर लेप करने से जलन तुरंत मिटकर शीघ्र ही आराम मिलता है तथा फफोला भी नहीं पड़ता दिन में दो-तीन बार लगाएं।

 

विकल्प

* आग से जल जाने पर जले स्थान पर तत्काल ग्लिसरीन लगाने से न दर्द होगा और ना ही छाले पड़ेंगे और ना ही चमड़ी लाल होगी।

* जलने पर स्वमूत्र का प्रयोग भी आश्चर्यजनक है। यदि किसी के हाथ पर खोलता हुआ पानी या उबलती हुई चाय गिर जाए और चमड़ी जल जाए और फफोले पड़ जाएं अथवा किसी का चेहरा आग से जल जाए और काला पड़ जाए तो जले भाग पर स्वमूत्र से भीगे कपड़े की पट्टी, स्वमूत्र लगाना या पैड़ बाँधते रहने से प्रायः चार-पांच दिन में ही चमड़ी सामान्य दशा में आ जाएगी। कालापन मिट जाएगा और जलने का कोई निशान भी पीछे नहीं रहेगा।

* तुलसी के रस को नारियल के तेल में मिलाकर जले हुए स्थान पर लगाने से जलन, घाव व छाले या फफोले सभी में लाभ मिलता है।

* पीपल की छाल को बारीक पीसकर लगाने से जलने से हुए घाव मैं बहुत जल्दी लाभ होता है।

 सावधानी

* जले हुए स्थान पर वर्फ का इस्तेमाल ना करें।

* दूसरा यदि फफोले पड़ गए हो तो उन्हें फोड़ें नहीं क्योंकि उससे इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है।

* हो सके तो घाव के स्थान पर ढीले कपड़ों का प्रयोग करें जिससे घाव पर किसी प्रकार का घिसाव ना हो।