Successful Ayurvedic treatment of toothache and gums pain in Hindi sagarvansi ayurveda

दांत-दाढ़ व मसूड़ों के दर्द का सफल स्वदेशी आयुर्वेदिक उपचार / Successful Ayurvedic treatment of toothache and gums pain in Hindi

दाढ़, दांत के दर्द का सफल उपचार  

मनुष्य के शरीर में सभी अंग अपने अपने स्थान पर महत्वपूर्ण है।  आज इस जगह हम बात कर रहे हैं मुख की जो अपने स्थान पर अपने सभी कार्य कर्ता हैं परंतु यदि मनुष्य अपने मुख की ठीक तरह से देखभाल ना करे तो मनुष्य को काफी पछताना पड़ सकता है क्योंकि मुख का कार्य होता है अन्न को या अन्य खाद्य पदार्थो को भोजन को दातों द्वारा चबा चबाकर उसको आगे की क्रिया के लिए भेजना होता है और चवाने की क्रिया में दातों में कुछ ना कुछ अन्न या अन्य खाद्य वस्तुओं का फसा रह जाना स्वभाविक है परंतु दांतों की उचित प्रकार से साफ सफाई या दातुन ना करने पर वह धीरे-धीरे अस्वस्थ होने लगते हैं। दांतों में सड़न, दातों में कीड़ा लगना, मसूड़ों का ढीला होना, मसूड़ों में या दाढ़ में तेज दर्द इत्यादि। यदि उचित प्रकार से दांतो की साफ सफाई का ध्यान ना दिया गया तो कइ प्रकार की दांतो की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता हैं। आज हम मसूड़ों दांतो में दर्द की उपयोगी और कारगर औषधि के बारे में बताने वाले हैं। दांतों के संबंध में sagarvansiayurveda.com की अन्य पोस्ट पढ़ सकते हैं। वहां आपको दांतो की अन्य समस्याओं के उपचार मिल जाएंगे। जैसा की हमने बताया कि स्वस्थ रहने के लिए और मुख के सौंदर्य के लिए दांतों की अच्छी तरह से सफाई अत्यधिक आवश्यक है।

               

दातुन से दांतों का उपचार व साफ-सफाई करने का तरीका

दांतो के लिए जैसे की हम सभी जानते हैं कि दातुन का इस्तेमाल प्राचीन काल से अत्यधिक लाभकारी बताया गया है। दातुन का इस्तेमाल आपके और हमारे पूर्वजों के समय से चला आ रहा है बस थोड़े से प्राकृतिक नियमों का सही तरह से पालन करना चाहिए। अपने दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखने के लिए मनुष्य प्रकृति द्वारा मिले औषधीय गुणों वाले वृक्षों की सहायता से दांतों, मसूड़ों और दाढ़ को स्वस्थ व निरोगी बना सकते हैं। आयुर्वेद के अनुसार दातुन दांतो के लिए उचित व सर्वश्रेष्ठ रहती है। प्रकृति द्वारा कुछ ऐसे वृक्ष हैं जिनमें अनेक औषधीय गुण हैं जिनकी पेड़ या पौधे की टहनी या डंठल से दातुन करना अधिक लाभदायक व गुणकारी रहता है। ऐसे वृक्षों के नाम इस प्रकार हैं नीम, बबूल, करंज खैर, महुआ, कीकर, अर्जुन, आक ।मौलसिरी, वट, इमली तथा कनेर के दातुन का इस्तेमाल करना विशेष लाभदायक है। आमतौर पर दातुन का इस्तेमाल टूथ ब्रश से अधिक लाभकारी व स्वास्थ्यकर होता है। इसके अतिरिक्त टूथपेस्ट और पाउडर की तुलना में दातुन अधिक गुणवान रहती है क्योंकि दातुन के द्वारा दातों के साथ - साथ मसूड़ों की मसाज व व्यायाम भी हो जाता है जिससे मसूड़ों में रक्त या खून का संचार काफी अच्छी तरह से होने लगता है। दांतों की सफाई के लिए टूथ ब्रश के इस्तेमाल से दातों की सफाई तो हो जाती है परंतु दातों पर जमी चिकनाई या चिकनापन को टूथ ब्रश नहीं हटा पाता और अधिक समय तक टूथब्रश के इस्तेमाल से दातों में कटाव भी शुरू होने लगता है। यदि टूथ ब्रश सामान्य से ज्यादा सख्त हुआ तो वह मसूड़ों को छती पहुचा सकता है।

 

दातुन बनाने व प्रयोग करने का तरीका दातुन बनाने के लिए उपरोक्त वृक्षों में से किसी एक वृक्ष की एक लगभग छोटी उंगली के बराबर गोलाई की नरम सी शाखा को लें और करीब 1 - 2 सेंटीमीटर तक दातुन के एक सिरे की ऊपर की छाल छीलकर छिले हुए हिस्से को गोल गोल घुमा कर दांतों के बीच मैं दवा कर दातुन को एक नरम ब्रश के समान बनाकर ब्रश की तरह हल्के हल्के दांतों व मसूड़ों पर चला कर या दांतों व मसूड़ों की मसाज करके मुख को स्वस्थ रखा जा सकता है।

 

दांतों या मसूड़ों के दर्द का उपचार नियम से दांतों में मंजन या साफ-सफाई ना करने की वजह से या दांतो में किसी खाद्य पदार्थों का छोटा सा अंश दातों में फंसे रह जाने से, ज्यादातर कुछ गर्म खाद्य पदार्थ के सेवन के तुरंत बाद ठंडे पानी के सेवन से, मानव शरीर के रक्त में कैल्सियम तथा फास्फोरस की मात्रा में कमीजैसे कुछ कारणों के चलते दाढ़, दांत व मसूड़े में सूजन उत्पन्न हो जाना, दांत का सड़ जाना, या दाढ़ खोखली हो जाना, या दाढ़ में सुराख हो जाना इन कारणों से दाढ़ का दर्द जिसे कैरिज कहते हैं उत्पन्न हो जाता है। यह बहुत ही भयानक व पीड़ादायक समस्या होती है। इस समस्या या दर्द में जब तक आराम ना हो जाए तब तक पीड़ित को आराम नहीं मिलता और ना ही किसी कार्य में मन लगता है क्योंकि इस समस्या की पीड़ा अत्यंत वेदना जनक होती है।

 

उपचार

इस दवा का अंग्रेजी नाम है 'कैल्शियम लैक्टास' यह देखने में चूने की तरह सफेद दिखने वाला पाउडर होता है। यह आपको एलोपैथी दवा घरों में उपलब्ध हो जाएगा। उसे लेकर अंदाजन 3 ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार दांतो पर हल्के हल्के हाथों से दातों पर मसाज करें और कोशिश करें कि जहां दर्द हो या जिस दाढ़ में खोखलापन हो गया हो उसके अंदर थोड़ी सी दवा लगाने का प्रयास करें। 4 से 5 मिनट तक दवा की मसाज करते रहे और ध्यान रहे कि दवा गले के अंदर ना जाए यदि किसी कारणवश चली भी जाती है तो भी कोई दुष्परिणाम नहीं है। जब क्रिया पूर्ण हो जाए तब दवा से सना थूक या लार को मुख से थूक दें। इस दवा से पीड़ित को पहले दिल से ही आराम मिलना शुरू हो जाएगा।

2. उपचार

काकड़ासिंगी एक तोला, छोटी पीपर एक तोला इन दोनों सामग्री को बारीक पीसकर आठ आने भर खाने का सोडा मिलाकर रख लें जहां दर्द हो वहां मल दें और नीचे को मुंह कर दें इससे मुंह में बनी सारी लाल नीचे की तरफ गिर जाएगी उसके बाद गर्म पानी से कुल्ला कर लें 10 मिनट में दर्द मिट जाएगा। यह एक अनुभूत प्रयोग है।