The right way to take care of the teeth of children and the way to learn the habit of brushing the children sagarvansi ayurveda

बच्चों के दांतों की देखभाल करने का सही तरीका व बच्चों को ब्रश करने की आदत डालने का उपाय। / The right way to take care of the teeth of children and the way to learn the habit of brushing the children

छोटे बच्चों के दाँतो की खास देखभाल (Special care of small children's teeth)

छोटे बच्चों की मुस्कुराहट ही दुनिया में सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाली चीज होती है। उनकी मुस्कुराहट देखकर किसी भी माता-पिता की सारे दिन की थकावट उतर जाती है व उनकी मुस्कुराहट देखकर वह खुद अपना दुख - दर्द, चिंता आदि का को भूल जाते हैं। सोचें वही छोटे बच्चों की मुस्कुराहट किसी वजह से चेहरे से गुम हो जाए तो कितना बुरा और अधूरा - अधूरा सा महसूस होने लगता है। ऐसा कुछ ही कारणों की वजह से हो सकता है। आज यहां हम आपको एसे ही कुछ कारण बताएंगे और आपको छोटे बच्चों के दाँतों की ठीक तरह से देखभाल करने का सही तरीका व बच्चों के दाँतो को स्वस्थ रखने के बारे में चर्चा करेंगे। छोटे बच्चों के मुख में बाल अवस्था की शुरुआत में लगभग 20 (पहले 2 - 4 दाँत आते हैं) दाँत निकलते हैं जिन्हें हम दूध के दाँत भी कहते हैं। दूध के दाँत का बहुत विशेष ध्यान रखना चाहिए जब से बच्चे के मुख में पहला दाँत निकल आए तब से ही उनके दाँतों का ख्याल रखना चाहिए जितनी बार भी बच्चे को दूध पिलाएं या कुछ भी खिलाने के बाद बच्चे के दांतों को एकदम साफ कपड़े को गीला कर के दांतों को कपड़े से होले - होले (धीरे - धीरे) साफ करना चाहिए और जब बच्चे के अन्य दूध के दांत निकल आएं तभी से बच्चे को दांतों को साफ करने की आदत डालनी चाहिए वैसे तो दांत को साफ करने के लिए दातुन से बेहतर कुछ भी नहीं है परंतु छोटे बच्चे दातुन नहीं कर सकेंगे इसलिए उनको शुरुआत में अधिक से अधिक मुलायम व छोटे-छोटे ब्रश से दाँतों की सफाई करें और उनको दांतो की साफ-सफाई की आदत डालें। छोटे बच्चों में दूध के दाँत आने के महत्व छोटे बच्चों में दूध के दांत का निकलना एक बहुत अद्भुत प्राकृतिक रचना है। दूध के दांतों के आने से छोटे बच्चों को खाने में आसानी,  बोलने में आसानी, छोटे - छोटे दातों से बच्चे और भी सुंदर और मासूम लगते हैं व इसके अतिरिक्त एक और वजह होती है दूध के दांतों के आने की  व अपने नए दाँतो के लिए जगह बनाते हैं परंतु दूध के दांत अधिक समय तक नहीं रहते और जल्द ही टूट जाते हैं। यदि किसी कारण से दूध का दांत गिर जाता है या जड़ से निकल जाता है तो इससे नए दाँतों पर भारी असर पड़ सकता है और नए दांत टेढ़े मेढ़े से निकलते हैं। जिससे मुख मंडल की खूबसूरती फीकी पड़ जाती है।

 

दूध के दाँतों में होने वाली समस्याएं

1.  दांतों में कीड़ा लगने की समस्या :-  छोटे बच्चे जो दूध पीते हैं, या कुछ मीठा खाते हैं, या जूस पीते हैं, या इन चीजों का सेवन बोतल से करते हैं और पीते-पीते सो जाते हैं और ध्यान ना देने की वजह से बोतल मुंह में लगी रह जाती हैं ऐसे बच्चों के दांत में सड़न या कीड़ा लगने जैसी समस्या सामने आती है। इस समस्या से बचने के लिए बच्चों की इस आदत को छुड़वाएं और सड़न की वजह से दातों में हो रहे छेद को डॉक्टरों से भरवा लें और आगे सड़न को होने से रोकें।

2. चोट या किसी कारणवश दांत का टूटना:-  किसी चोट की वजह से या अन्य किसी कारण से दांत का जड़ से निकल जाए या दाँत अगर किसी कारण से टूट जाए तो उस दाँत को ठंडे पानी में ठंडे दूध में डालकर जल्द से जल्द लगभग 30 मिनट के भीतर किसी अच्छे दाँत के चिकित्सक से संपर्क करें यदि दांत जड़ से टूटा हुआ हो और आप दिए गए समय में चिकित्सक से संपर्क कर लें तो उस दाँत को दोबारा उस स्थान पर लगाया जा सकता है।

3.  छोटे बच्चों को ब्रश करने की आदत सिखाएं :- अधिकांश माता-पिता के लिए अपने बच्चों में ब्रश करने की आदत डालना एक बहुत बड़ी समस्या होती है आप अपने बच्चों को ब्रश करना ऐसे सिखा सकते है। छोटे बच्चे यानी 2 से 3 साल के बच्चे अपने माता-पिता या अपने बड़ो को देख कर सीखता है। इस आयु के दौरान बच्चों को खुद से ब्रश करने दें। उसके ब्रश करने के बाद आप खुद उसके दांतों को ब्रश से साफ करें जब आपका बच्चा थोड़ा बड़ा हो जाए यानी लगभग 5 से 6 वर्ष की आयु तक का हो जाए तो बच्चे को माता-पिता अपने समक्ष  ब्रश करवाएं और ध्यान रखें कि बच्चा ठीक से दाँत साफ करें टूथपेस्ट को निगले नहीं व पूरा बाहर ही थूक दे और उसको ठीक तरह से कुल्ला करवाएं इस सब के बाद साथ - साथ उसकी जिव्या को जरूर साफ करवाएं इसके अतिरिक्त बच्चे को दिन में दो बार दाँत साफ करने के लिए प्रेरित करें व सिखाएं।

                               

दांतो की सड़न को रोकने का तरीका

1.  कम से कम दिन में दो बार मंजन करने की आदत डालें।

2.  बच्चों को खाने में स्वास्थ्य के लिए लाभदायक भोजन ही दें व मीठा,चीनी से निर्मित भोज्य पदार्थ, कार्वोहाइड्रट की चीजों से दूरी बनाएं व बच्चों की नाराजगी को दूर करने के लिए टॉफी की आदत ना डालें। टॉफी से दांतों में सबसे ज्यादा सड़न उत्पन्न होती है।

3.  समय-समय पर अपने बच्चों के दाँतों की जांच किसी अच्छे दाँतो के चिकित्सक से जरूर करवाएं।