Ayurvedic successful treatment of typhoid fever with names such as periodic fever, interim fever, motijara sagarvansi ayurveda

मियादी ज्वर, अंतरिम ज्वर, मोतीझरा जैसे नामों वाला टाइफाइड बुखार का आयुर्वेदिक सफल उपचार / Ayurvedic successful treatment of typhoid fever with names such as periodic fever, interim fever, motijara

टाइफाइड की स मस्या मियादी बुखार

टाइफाइड एक एसी समस्या है जिसमें साल्मोनेला टाइफी जैसे खतरनाक बैक्टीरिया से दूषित जल या भोजन के सेवन से यह बैक्टीरिया मानव शरीर में प्रवेश कर जाता है जिसके बाद मानव में यह अपना असर दिखाने लगता है। इस खतरनाक साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया के मानव शरीर में प्रवेश के बाद पीड़ित टाइफाइड नाम की गंभीर बीमारी से ग्रसित हो जाता है। इस गंभीर बीमारी को टाइफाइड के साथ-साथ मोतीझरा, मियादी बुखार और  अंत्रिम ज्वर भी कहा जाता है। इस गंभीर समस्या में मनुष्य तेज ज्वर, आलस, थकान कमजोरी, बदन दर्द, भूख ना लगना, सिर दर्द, दस्त लगना और कुछ कुछ लोगों में छाती में कफ जम जाना और पेट में भारी पीड़ा  जैसे लक्षण भी महसूस होते है। साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया का मानव शरीर में प्रवेश करने के बाद आमतौर पर इस रोग का विकास 1 से 2 सप्ताह में हो जाता है और इस रोग के लक्षण भी प्रतीत होने लगते हैं। इस रोग में यदि कोई दिक्कत या यह रोग यदि उग्र ना हो तो इस रोग की अवधि 20 से 30 दिन तक रहती है। दुनिया भर में यह रोग बैक्टीरिया के की वजह से होता है। ऐसे भोज्य पदार्थ या ऐसा पेय जो साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया से दूषित पदार्थों का सेवन करने से ही टाइफाइड जैसी गंभीर समस्या से पीड़ित हो जाते हैं। यह रोग संक्रमित व्यक्ति से साधारण व्यक्ति में बहुत जल्दी फैलता है। यदि टाइफाइड जैसी समस्या का उचित उपचार ना किया जाए तो कम से कम 4 मै से 1 की मृत्यु टाइफाइड के कारण हो जाती है। साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया से ग्रसित या कहें कि टाइफाइड से ग्रसित मरीज के साथ अधिक निकटता की वजह से भी यह फैलता है। देखा गया है कि टाइफाइड रोग औधोगिक देशों में या कहें के विकसित देशों में बहुत कम ही होता है परंतु विकासशील देशों में यह एक गंभीर समस्या व खतरा है। स्वास्थ्य के लिए और विशेष तौर पर यह छोटे बच्चों के लिए अधिक खतरे वाली बीमारी मानी जाती है। यह समस्या भारत जैसे विकासशील देश में अधिक पाई जाती है और बहुत आम बीमारी मानी जाती है।

 

पथ्य (खाने योग्य)  

1. दूध और दूध से निर्मित पेय।  

2. जूस और सूप जैसे बहुत सारे तरल पदार्थ।

3. पनीर, अंडे और प्रोटीन प्रदान करने वाले भोज्य पदार्थ।

4. रिफाइंड़ अनाज जैसे मैदा, सूजी आदि और उनके उत्पादों जैसे कम फाइबर वाले भोज्य पदार्थ। धुली हुई दाल सॉफ्ट प्युरी में अच्छी तरह से पकाई सब्जियां और उबला हुआ आलू

अपथ्य (न खाने वाली वस्तुएं)

1.  केला और पपीता को छोड़कर सभी कच्ची सब्जियां व फल।

2. फाइबर की अधिक मात्रा वाले पदार्थ जैसे साबुत अनाज और उनके उत्पाद साबुत दालें इत्यादि।

3. उत्तेजक भोजन जैसे मसालेदार सब्जियां, अचार, चटनी, और गेहन स्वाद वाली सब्जियां जैसे गोभी, शिमला मिर्च, शलगम, मूली, प्याज और लेसन का सेवन टाइफाइड में वर्जित है।

4. तले हुए भोजन जैसे  लड्डू, समोसे, पकोड़े और हलवा।

 

उपचार              

1. कस्तूरी भैरव रस एक से दो गोली शहद, पान के रस और अदरक रस के साथ देते रहें इससे किसी तरह की अन्य औपसर्गिक उपद्रव की संभावना नहीं रहती और मियादी बुखार (Typhoid Fever) अपनी मियाद के अनुसार ठीक हो जाता है।

2. कस्तूरी भैरव रस  (वृहत) यह उपरोक्त कस्तूरी भैरव रस से अधिक क्षमता वाला एवं प्रभावी है इसे मियादी बुखार टाइफाइड फीवर में प्रारंभ से अंत तक एक से दो गोली सुबह-शाम अदरक के रस और शहद के साथ दें।

3. कस्तूरी भूषण रस एक से दो गोली सुबह शाम अदरक के रस और शहद के साथ दें यह इंफ्लुएंजा (श्लैष्मिक ज्वर) मैं भी अच्छी सफलता मिलती है।

4. जीर्ण ज्वरांकुश रस एक गोली जल या शहद के साथ दिन में तीन बार के सेवन सभी प्रकार के ज्वर समाप्त होते हैं।