Best Solutions For Chikungunya sagarvansi ayurveda

चिकनगुनिया के लिए सबसे अच्छे व आसान घरेलू उपचार / Best Solutions For Chikungunya

चिकनगुनिया एक ऐसी समस्या है जिसमें बुखार के साथ - साथ शरीर के विभिन्न जोड़ों में भी दर्द उत्पन्न हो जाता है। चिकनगुनिया कुछ विशेष प्रकार के विषैले मच्छरों के काटने से उत्पन्न हो जाता है। इस रोग में काफी तेज बुखार, खून में प्लेटलेट्स की कमी और शरीर के विभिन्न जोड़ों  में असहनीय दर्द पीड़ा होने लगती है। चिकनगुनिया से पीड़ित व्यक्ती को विभिन्न जोड़ों में भीषण दर्द को झेलना पड़ता है। चिकनगुनिया की समस्या के शुरुआती लक्षण कुछ - कुछ डेंगू से मिलते-जुलते रहते हैं परंतु डेंगू में उचित समय पर उचित उपचार ना मिल पाने के कारण पीड़ित की मृत्यु हो जाती है, पर चिकनगुनिया में ऐसा नहीं होता है एक बार यह समस्या होने के बाद इस रोग से निपटने के लिए मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता ही काफी होती है। मानव शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता चिकनगुनिया से निपटने के लिए अपने आप ही प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेती है ओर दोबारा रोग को मानव शरीर पर हावी नही होने देती,परन्तु चिकनगुनिया के लक्षण को कुछ दिनों तक झेलना पड़ सकता है। जैसे जोड़ों में दर्द को काफी लंबे समय तक झेलना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त कभी - कभी कुछ पीड़ित व्यक्तीयो में अधिक समय तक सर दर्द, उल्टी, थकान इत्यादि जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। इस समस्या में सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात है इस समस्या के चलते, या समस्या के बाद उत्पन्न जोड़ों का दर्द। यह समस्या एक व्यक्ति से दूसरे तक फैल सकती है, यदि उस समस्या से पीड़ित व्यक्ती को काटने वाला मच्छर किसी अन्य व्यक्ति को भी काट ले तो यह रोग दूसरे व्यक्तियों में भी फैल जाता है।

चिकनगुनिया के लक्षण

1. उलटी या  उवकाइ महसूस होना।

2.  मांसपेशियों में भयंकर पीड़ा होना।

3. अचानक तेज ज्वर का अनुभव लगभग 5 से 6 दिन तक रहता है परंतु अन्य लक्षण कई दिनों तक बने रहते हैं।

4. शरीर में अधिक थकान का अनुभव होना।

5. शरीर के जोड़ों में भयानक पीड़ा होना जो कि अधिकतर काफी दिनों तक बनी रह सकती है।

6. शरीर पर लाल रंग के छोटे-छोटे चकत्ते या लाल धब्बे दिखाई देना।

विशेष

यह समस्या छोटे बच्चों या  60 साल से ऊपर के व्यक्तियों, दिल के मरीजों के लिए व उच्च रक्तचाप व निम्न रक्तचाप व डायबिटीज से पीड़ित व्यक्तीयों को इस समस्या में स्वास्थ्य का काफी अधिक खतरा होता है। इसलिए इस प्रकार की समस्या में ऐसे व्यक्तियों को विशेष ध्यान देना जरूरी होता हे। चिकनगुनिया एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्तियों में सिर्फ और सिर्फ मच्छरों के काटने से ही हो सकता है इसलिए जहां तक संभव हो मच्छरों के काटने से बचें। घर के आस-पास किसी भी प्रकार का जलभराव ना होने दें इससे मच्छर उत्पन्न होते हैं जो की स्वास्थ के लिए अधिक खतरे की निशानी है। ऐसे वस्त्रों का प्रयोग करें जो शरीर को पूर्ण रूप से या शरीर के अधिक से अधिक भाग को ढक सके।

चिकनगुनिया के लिए सबसे अच्छा समाधान या उपचार (Best Solution For Chikungunya)

1. पपीते की पत्तियां डेंगू में जितनी लाभकारी हैं उतनी ही लाभकारी चिकनगुनिया में भी हैं। पपीते की पत्तियों में बुखार से नष्ट हुई रक्त की प्लेटलेट्स को बढ़ाने का प्राकृतिक गुण होता है। 5 - 7 पपीते की पत्तियों को लेकर उसका डंठल हटाकर पत्तियों को पीसकर उसका रस निकाल लें और पीड़ित को दिन में दो से तीन बार सेवन करने के लिए दें। इससे नष्ट हुई प्लेटलेट्स दोबारा बनने लगती हैं।

2. चिकनगुनिया में गिलोय का उपयोग भी काफी लाभदायक होता है। गिलोय के सेवन से बुखार में आराम मिलता है इसके साथ-साथ प्लेटलेट्स की संख्या को बढ़ाने में भी गिलोय अहम भूमिका निभाता है। यदि गिलोय आसानी से ना मिले तो गिलोय के कैप्सूल या गोलियां भी ली जा सकती हैं यह किसी भी आयुर्वेदिक स्टोर पर उपलब्ध होती हैं।

3. चिकनगुनिया के दर्द में राहत पाने के लिए बर्फ का सेक। बर्फ का सेक करने से चिकनगुनिया के दर्द में बहुत आराम मिलता है। इसको करने की विधि इस प्रकार है :-  बर्फ के टुकड़ों को अच्छे से बारीक कूट लें और इस कूटी हुई बर्फ को एक छोटी तौलिया में लपेट कर दर्द वाले स्थान पर 4 - 5 मिनट तक सेक करें इससे दर्द में काफी आराम मिलेगा।  इस प्रक्रिया को अन्य भाषा में कोल्ड कंप्रेस भी कहा जाता हैं।

 

4. अजवाइन और तुलसी का प्रयोग चिकनगुनिया के उपचार के लिए बहुत ही लाभदायक व घरेलू दवा हे। प्रयोग विधि अजवाइन, तुलसी, किशमिश व नीम की सूखी पत्तियों को एक गिलास पानी में उबालकर पेय बना लें और इस पेय को दिन में 2 - 3 बार सेवन करें।