Home remedies for fever in any season sagarvansi ayurveda

तुलसी, काली मिर्च और बताशे से हो जाएगी आपके बुखार की छुट्टी / Home remedies for fever in any season

वायरस के संक्रमण से होने वाले बुखार को वायरल फीवर (Viral Fever) कहते हैं। वायरल बुखार के वायरस गले में सुप्तावस्था में निष्क्रिय रहते हैं। ठंडे वातावरण के संपर्क में आने, फ्रिज का ठंडा पानी, शीतल पेय पीने आदि से ये वायरस सक्रिय होकर हमारे प्रतिरक्षा तंत्र को प्रभावित कर देते हैं।

वायरल बुखार की जानकारी (Details of Viral Fever)

यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बहुत आसानी तथा बड़ी तेजी से पहुँचती है। इसके विषाणु साँस द्वारा एक से दूसरे में पहुँचते हैं। फैलने के बाद फ्लू एक-दो दिन तथा कभी-कभी कुछ घंटों में सक्रिय हो जाता है।

वायरल बुखार के लक्षण

  • आँखें लाल होना
  • इस बुखार में शरीर का ताप 101 डिग्री से 103 डिग्री या और ज्यादा भी हो जाता है
  • खांसी और जुकाम होना
  • जोड़ों में दर्द और सूजन होना
  • थकान और गले में दर्द होना
  • नाक बहना
  • बदन दर्द होना
  • भूख न लगना
  • लेटने के बाद उठने में कमजोरी महसूस करना
  • सिरदर्द होना

 

वायरल बुखार शरीर के कमज़ोर प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System) की वजह से होता है। अगर शरीर की प्रतिरक्षण क्षमता या इम्यून सिस्टम मजबूत हो तो यह बीमारी जल्दी नहीं होती।

ज्वर कैसा भी क्यों न हो

गर्मियों में - तुलसी की पत्तियां 11, काली मिर्च 7 दोनों को 60 मिलीलीटरजल में रगड़कर प्रातः और सायं रोगी को पिलाएं।

बरसात और सर्दियों में - यही 125 मिलीलीटर जल में उबालकर आधा रह जाने पर रोगी को पिलाएं । काली मिर्च थोड़ी कूटकर डालनी चाहिए । 12 साल से कम आयु वाले बच्चों को चौथाई मात्रा (3 तुलसी की पत्तियां, दो काली मिर्च) 10 ग्राम पानी में पीसकर आयु को ध्यान में रखते हुए दें । मिठास के बिना काम न चले तो 10 ग्राम मिश्री का चूर्ण डाल सकते हैं । आवश्यकतानुसार 2 दिन से 7 दिन तक पिलाएं ।

दूसरी विधि

सात तुलसी की पत्तियां, सात काली मिर्च और सात बताशे (या 10 ग्राम मिश्री) 3 कप पानी में डालकर उबालें । एक कप रह जाने पर गरम-गरम पीकर बदन ढककर 10 मिनट लेट जाएं । बुखार, फ्लू ,मलेरिया, सर्दी का जुकाम, हरारत में रामबाण है। आवश्यकतानुसार दिन में दो बार प्रातः एवं रात्रि सोते समय दो-तीन दिन लें।

ज्वर उतारने के लिए

(क). ज्वर उतारने के लिए हथेलियों और पगतलियों को घिया के गोल टुकड़ों से उंगलियों की तरफ झाड़ते हुए मलें अथवा कपड़े से उंगलियों की तरफ झाड़ें ।

(ख). कागजी नींबू के पेड़ की पत्तियां लेकर हाथ में मल कर महीन कपड़े में बांधकर बुखार वाले रोगी के नाक के पास ले जाकर सूंघाऍ कम से कम सुबह-शाम सूंघाऍ ।

(ग). मरीज के शरीर पर सामान्य पानी की पट्टियां रखें। पट्टियां तब तक रखें, जब तक शरीर का तापमान कम न हो जाए। पट्टी रखने के बाद वह गरम हो जाती है इसलिए उसे सिर्फ 1 मिनट तक ही रखें।

(घ).अगर माथे के साथ - साथ शरीर भी गर्म है तो नॉर्मल पानी में कपड़ा भिगोकर निचोड़ें और उससे पूरे शरीर को पोंछें।