Home Remedy for Fever in hindi bukhaar ka gharelu upchaar sagarvansi ayurveda

बुखार का नाश करने वाला घरेलू उपचार / Home Remedy for Fever in hindi bukhaar ka gharelu upchaar

ज्वर नाशक घरेलू उपचार (Home remedies for fever)

ज्वर जिसे साधारण भाषा में या सहज भाषा में बुखार नाम से जाना जाता है। ज्वर एक ऐसी स्थिति का नाम है जिसमें मानव शरीर का तापमान बढ़ने लगता है। साधारण तौर पर मानव शरीर का तापमान 98.6 डिग्री फारेनहाइट होता है परंतु ज्वर होने की अवस्था मैं यह तापमान सामान्य से बढ़कर अधिक हो जाता है। बुखार होना मानव शरीर में हो रहे संक्रमण से लड़ने का एक लक्षण होता है। संक्रमण की स्थिति में मानव शरीर में रक्त एवं लसीका प्रणाली श्वेत रक्त कोशिकाओं (White Blood Cells) का उत्पादन करती है जो संक्रमण या कहे कि रोगाणुओं से लड़ती है इस कारण से मानव शरीर की सभी मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है और इसी कारण से पूरे शरीर में पीड़ा उत्पन्न होने लगती है इसमें शरीर का तापमान भी बढ़ता है और शरीर में कंपकपी महसूस होती है। बुखार में शरीर का तापमान 98.6 डिग्री फारेनहाइट से बढ़कर 105.8 डिग्री फारेनहाइट से 107.6 डिग्री फारेनहाइट तक जा सकता है। जोकि बुखार की बहुत ही विषम स्थिति मानी जाती है। इस दौरान शरीर में ठंड की लहरें सी होती हैं और शरीर में बहुत कमजोरी का अनुभव भी होता है। बुखार कई कारणों से हो सकता है जिनमें से कुछ स्थिति सामान्य रहती हैं परंतु कुछ स्थिति में बुखार या ज्वर बेहद गंभीर रूप ले लेता है। इसके अंतर्गत वायरल, परजीवी संक्रमण, बैक्टीरियल, साधारण सर्दी, संक्रमण, मूत्र पथ में संक्रमण, मलेरिया, दिमागी बुखार, अपेंडिसाइटिस आदि। इसके अलावा गैर संक्रमण कारणों में डीप वीन थ्रम्बोसिस, वस्क्युलिटिस, कैंसर, एवं दवा के साइड इफैक्ट्स इत्यादि हैं। वायरल बुखार शरीर के कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र की वजह से होता है यदि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता प्रतिरक्षा क्षमता या इम्यून सिस्टम अगर मजबूत है तो यह बीमारी आसानी से नहीं होती।

 

वायरल बुखार के लक्षण

खांसी और जुखाम होना,

नाक बहना,              

बदन दर्द होना,

*  लेटने के बाद उठने में कमजोरी महसूस होना,

सिर में दर्द होना,

आंखे लाल होना,

*  शरीर के विभिन्न जोड़ों में दर्द होना,

*  भूख ना लगना आदि।    

 

ज्वर नाशक घरेलू उपचार (Home remedies for fever)

 

ग्रीष्म ऋतु में (गर्मियों में) 11 तुलसी की पत्तियां और 7 काली मिर्च के दानों को 60 ग्राम जल में रगड़ कर प्रातः और सायं रोगी को पिलाएं बरसात और शीतकाल में (सर्दियों में) यही 125 ग्राम जल में उबाल कर आधा रह जाने पर रोगी को पिलाएं। काली मिर्च थोड़ी कूटकर डालनी चाहिए। 12 साल से कम आयु वाले बच्चों को इसकी चौथाई मात्रा यानी तीन तुलसी की पत्तियां दो काली मिर्च 10 ग्राम पानी में पीसकर आयु को ध्यान में रखते हुए दें। यदि मिठास के बिना काम ना चले तो 10 ग्राम मिश्री का चूर्ण भी डाल सकते हैं। आवश्यकतानुसार 2 से 7 दिन तक पिलाएं।

 

2 उपचार

7 तुलसी की पत्तियां, 7 काली मिर्च और 7 बताशे या 10 ग्राम मिश्री 3 कप पानी में डालकर उबालें एक तिहाई रह जाने पर या एक कप रह जाने पर गरम - गरम  पीकर बदन ढ़क्कर 10 मिनट लेट जाएं। बुखार, मलेरिया, सर्दी का जुकाम, फ्लू, व हरारत में रामबाण उपचार हैं। आवश्यकतानुसार दिन में दो बार प्रातः एवं रात्रि सोते समय दो-तीन दिन लें।

 

सहायक उपचार

वात और कफ ज्वर में उबालकर ठंडा किया हुआ पानी पिलाना चाहिए। औटाया हुआ जल वात तथा कफ ज्वर नष्ट करता है। जो जल औटाते - औटाते धीरे-धीरे झाग रहित तथा निर्मल हो जाता हो जाए तथा आधा शेष रह जाए उसे ही औटा हुआ जल या उष्णोदक समझना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार

* 1 किलो का पाव भर पका हुआ गर्म जल कफ ज्वर का नाश करता है।

* 1 किलो का तीन पाव गरम जल पित्त ज्वर का नाश करता है।

*  एक दो बार उबाला हुआ पका जल रात्रि में पीने से कफ वात और अजिर्ण नष्ट होते हैं।

 

सभी प्रकार के ज्वर में बेदाना जिसको मीठा अनार कहते हैं बिना किसी हिचक के पीड़ित व्यक्ती को दिया जा सकता है। इससे ज्वर के समय की प्यास भी शांत होती है ज्वर में साबूदाना, दूध, चीकू, मौसमी, पथ्य हैं।