Remedies for the biggest problem of summer season heat stroke “Loo” sagarvansi ayurveda

लू से बचने के साधारण से उपाय व लू से बचने की चमत्कारी औषधि / Remedies for the biggest problem of summer season heat stroke “Loo”

लू लगना एक आम समस्या

लू लगना एक आम समस्या है। ग्रीष्म ऋतु (गर्मी) के दिनों में सूर्य के भयानक ताप एवं गर्म हवाओं के झोंकों से प्रायः लू लग जाया करती है। अधिक परिश्रम, खाली पेट, नंगे सर धूप में घूमना या चलना,  थकान, कब्जियत, दुर्बलता आदि कारणों से मनुष्य का लू के चपेट में जाने की संभावना बढ़ जाती है। सिर खुला रहने से मस्तिष्क पर धूप का अति शीघ्र प्रभाव होता है जिससे मानव शरीर पर तत्कालीन प्रभाव पड़ता है। ग्रीष्म ऋतु के दिनों में मानव शरीर से पसीने के द्वारा निकले शरीर में पानी की पूर्ति होती रहनी चाहिए यदि कभी किसी कारण से ऐसा नहीं हो पाता है तब लू लगने का खतरा अधिक हो जाता है। उस समय मानव शरीर में उष्णता की मात्रा अधिक हो जाने से स्वेद ग्रंथियां काम करना बंद कर देती हैं जिसकी वजह से शरीर में ऊष्मा का निकलना बंद हो जाता है और मानव शरीर का तापमान बढ़ जाता है तथा शरीर अपने तापमान को नियंत्रित कर पाने की अपनी क्षमता खो देता है। त्वचा गरम होकर सूख जाती है और शरीर में पानी की कमी हो जाती है। नाड़ी कभी धीमे तो कभी-कभी तेज हो जाती है। शरीर का तापमान बढ़ते-बढ़ते कभी-कभी तो 106 तक हो जाता है और इस अवस्था में मनुष्य के जीवन पर खतरा या संकट उतपन्न हो जाता है।

               

चिकित्सा

गर्मियों के समय में एक कच्चे प्याज को सबसे ऊपर का सूखा या मरा हुआ छिलका हटाकर प्याज को अपने पेंट की जेब में या पहने हुए कपड़ों की किसी भी जेब में सिर्फ रखने से ही लू नहीं लगती। इसके साथ ही प्याज को दोनों समय खाना खाने के साथ ही  कच्चे प्याज का सेवन करने से लू से बचाव होता है। प्याज में तमाम औषधीय गुण शामिल हैं जिससे प्याज लू से बचाने में सक्षम सिद्ध होती है।

 

चिकित्सक के उपस्थित होने से पहले या चिकित्सा मिलने से पहले तत्कालिक अवस्था में यह उपचार करने चाहिए

 1.  लू की चपेट में आए रोगी को ठंडे शीतल हवादार और साफ स्वच्छ जगह पर रखना चाहिए तथा रोगी के वस्त्रों को ढीला कर देना चाहिए और रोगी की बेहोशी को दूर करने के साथ-साथ रोगी के शरीर का तापमान कम करने का प्रयास कोशिश करनी चाहिए।

 2. रोगी के पेट सिर हाथ- पैर को ठंडे पानी से धोएं और रोगी के शरीर पर ठंडे पानी में भीगी तोलिया या साफ कपडे से रोगी के शरीर को बार-बार पोंछें और इस क्रिया को बार-बार तब तक दोहराएं जब तक रोगी के शरीर का तापमान सामान्य के बराबर या लगभग सामान्य ना हो जाए। 3. उबकाइ, उल्टी, दस्त या प्यास की स्थिति में रोगी को पुदीने का अर्क या कपूर का अर्क, अमृतधारा आदि को पानी में मिलाकर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में थोड़ी देर के अंतराल पर रोगी को चम्मच से यह देते रहना चाहिए ताकि रोगी को उपरोक्त समस्या से राहत मिलती रहे या मिल सके।

4.  बेहोशी की अवस्था में रोगी के सीने और गले पर तारपीन के तेल की हल्की-हल्की मालिश करनी चाहिए और गर्म पानी में एक कपड़े को भिगाकर गले पर रखकर सूखे कपड़े से बांध दें इस क्रिया को करने से लू के रोगी को रही बेहोशी को दूर किया जा सकता है।

5. कच्चे आम को पानी में उबालकर उसका पना बना लें (कैरी की छाछ) तथा इस आम के पना में सेंधा नमक, भुना हुआ जीरा, पुदीना तथा मिश्री आदि को मिलाकर रोगी को या पिलाएं इससे शरीर की गर्मी का नाश होता है और शरीर में स्फूर्ति तथा ताजगी आती है।गर्मी के दिनों में स्वस्थ व्यक्ति भी इस आम के पना का सेवन कर सकते हैं यह लू से बचने की बहुत अच्छी और प्रसिद्ध औषधिय गुणो युक्त व स्वादिस्ट पेय है।

6. ग्रीष्म ऋतु में पैदा होने वाले फलों का सेवन जैसे गर्मी में मिलने वाले फल जैसे तरबूज खरबूज का सेवन खूब करना चाहिए और घर से बाहर निकलने से पहले अच्छे से पानी पी लें अधिक प्रोटीन वाले भोज्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए लू से ठीक होने पर भी कुछ दिनों तक सावधानी रखें धूप में निकलने से बचें और शरीर में पानी की कमी ना होने दें और खाली पेट गर्मी में या धूप में निकलने से परहेज करें क्योंकि खाली पेट लू की चपेट में आने का खतरा अधिक बढ़ जाता है।

           

पना बनाने की वीधि

कच्चे आम को पानी में उबाल लें जब कच्चा आम पानी में उबल जाए तब कच्चे आम का छिलका उतारकर अलग कर दें और आम के गूदे को हाथों से ठंडे पानी में मसल लें और आम की गुठली को उसका गूदा निकाल कर अलग कर दें अब ठंडे पानी और आम के घोल को अच्छे से मिला लें और इसमें काला नमक, भुना हुआ जीरा और स्वाद के अनुसार चीनी मिला दें। बस पना तैयार है।