Easy home remedies to get rid from the problem of Thin, Weak and Underweight body (In Hindi) sagarvansi ayurveda

आसान से घरेलू उपचार के द्वारा दुबले व कमजोर शरीर की समस्या से निजात पाने का तरीका / Easy home remedies to get rid from the problem of Thin, Weak and Underweight body (In Hindi)

दुबलेपन (Underweight) का नाश करने वाला पौष्टिक आहार

कहा जाता है कि शरीर मांसल या अधिक मांसल हो तो विशेष प्रकार की बीमारियों का केंद्र हो जाता है। वह ऐसी कई छोटी - बड़ी बीमारियों से ग्रसित होने लगता है और देखते ही देखते तमाम प्रकार की बीमारियां मांसल या अधिक मांसल व्यक्ति को घेर लेती हैं। उसी प्रकार से अधिक कमजोरी या दुबले शरीर का होना भी काफी कष्टदाई है और परेशानी का कारण होता है। ऐसे व्यक्ति जिनको भूख कम लगने लगती है या ज्यादा भूख नहीं लगती है इसी कारण से ऐसे व्यक्तियों की भोजन के प्रति अरुचि भी होने लगती है और उसकी भोजन करने की इच्छा भी समाप्त होने लगती है। भोजन करने की इच्छा समाप्त होने से व्यक्ति भोजन या आहार के प्रति घृणा करने लगता है और भोजन ना करने से मानव शरीर को पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व या उचित मात्रा में पोषण नहीं मिल पाता इसी कारण से व्यक्ति को दुबलेपन का सामना करना पड़ता है। जैसा की मैंने उपरोक्त सूचित किया है जिस प्रकार मोटापे के कई दुष्परिणाम हैं उसी प्रकार दुबलेपन के भी कई दुष्परिणाम हैं जैसे कि दुबलेपन से जूझ रहे पीड़ित में कमजोरी, आलस्य और थकान इत्यादि प्रकार की समस्याएं घेर लेती हैं और यह तो आप सभी जानते हैं कि यदि कोई बीमारी लग जाए तो वह आसानी से तो जाती ही नहीं है। इसलिए आज यहां हम आपको दुबलेपन से निपटने के लिए काफी आसान और घरेलू उपचार बताने वाले हैं जिन्हें अपनाकर आप या आपके करीबी व्यक्ति जिनके स्वास्थ्य के प्रति आप हमेशा तत्पर जागरूक रहते हैं। ऐसा कोई व्यक्ति यदि दुबलेपन का शिकार हैं तो अब वह भी अच्छे व पुष्ट शरीर वाले हो जाएंगे।

               

 दुबले होना या दुबलेपन होने के प्रमुख कारण

अक्सर यह देखा गया है कि मोटापे से पीड़ित व्यक्ती काफी चिंतित रहते है और अपने वजन को नियंत्रित करने के लिए कई प्रकार के प्रयास में रहते है वहीं दूसरी ओर विश्व भर में ऐसे भी व्यक्ति हैं जो अपने दुबलेपन से परेशान हैं और अपने वजन को बढ़ाने के लिए तमाम प्रयास करते रहते हैं। देखा जाए तो अधिक मोटापा और अधिक दुबलापन होना भी मानव के लिए नुकसानदायक होता है। दुबलापन होने के कुछ कारण निम्नलिखित है :-

1.  मानसिक तनाव।

2.  पाचन तंत्र की कमजोरी या गड़बड़ी।

3.  अधिक चिंता करने वाले व्यक्ति।

4.  हार्मोन का असंतुलन।

5.  T.B. में भी व्यक्ति अधिक कमजोर हो जाता है (इसका इलाज अलग होता है)

लक्षण

1. सामान्य व्यक्ति से जल्दी थकान महसूस होना।

2.  रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम हो जाना।

3.  ऐसे व्यक्तियों को सांस, क्षय, ह्रदय, गुर्दे आदि के रोग बहुत जल्दी होते हैं।

4. दुबलेपन में टाइफाइड भी बहुत जल्दी अपनी चपेट में ले लेता है।

 

घरेलू उपचार

जौ की खीर आवश्यकतानुसार जौ को पानी में भिगोकर और चावल के स्थान पर 60 ग्राम की मात्रा में 400 ग्राम दूध डालकर खीर बनाएं और इसका नाश्ता 2 माह तक करें। 2 महीनों के प्रयोग से ही दुबले व्यक्ति मोटे हो जाते हैं रोजाना खीर का सेवन ना कर सके तो सप्ताह में 2 से 3 बार अवश्य लें।

विशेष जौ का पानी प्रतिदिन प्रातः सायं उबले हुए जौ का पानी पीने से खून की वृद्धि होती है परंतु यह प्रयोग गर्मियों में उपयुक्त रहता है।

 

जौ का पानी (वार्ली वाटर) बनाने की विधि:- छिलके युक्त जौ के दानों पर थोड़े पानी का छींटे मारकर और थोड़ा कूटकर जौ को छिलके से अलग कर लें छिलका उतारकर साफ करके मोटा कूटकर बनाया हुआ जौ का दलिया 4 से 5 चम्मच की मात्रा में लेकर लगभग आधा लीटर पानी में डालकर उबालें तीन से चार उबाल आने पर बर्तन को आंच पर से उतार कर पानी को निथार कर छान लें बचे हुए जौ बर्तन की तली में बैठ जाते हैं फिर इस छने हुए पानी में मिश्री मिलाकर एक गिलास या एक कप जौ का पानी धीरे-धीरे पी लें। शिशु को जब गाय या भैंस का दूध देना शुरु किया जाता है तब उसमें आधा जौ का पानी मिलाकर देने से वह दूध हल्का पौष्टिक और सहज पचने वाला बन जाता है।

 

विकल्प छुहारे की खीर 400 ग्राम दूध में 2  साफ और अच्छे छुहारे डालकर लगभग आधा रह जाने पर 2 चम्मच की मात्रा में मिश्री या खाँड़ मिलाकर पीने लायक ठंडा होने पर सेवन करें। यदि छुआरे अधिक गर्मी करें तो केवल छुहारों का दूध मात्र पी लेना पर्याप्त होता है। इस प्रकार छुहारे के सेवन से मांस, बल, वीर्य बढ़ता है। छुहारा रक्त बनाता है व शरीर को मोटा करता है। फेफड़ों और छाती को बल देता है तथा जुकाम, कफ में लाभदायक है। कब्ज हटाकर प्रायः शौच भी खुलकर होता है। आयुर्वेद के अनुसार छुहारे खाने में स्निग्ध, गुरु, मधुर, विपाक में मधुर एवं शीत वीर्य वाला आदि अनेक गुणो से भरपूर होने के कारण कई रोगों को सदैव के लिए दूर करने में सक्षम है।

विशेष

1.  इसे केवल शीतकाल में 2 से 3 सप्ताह तक प्रयोग करें।

2.  सोते समय इसके सेवन के 2 घंटे बाद तक पानी ना पिएं।

3.  इस विधी से तीखी व भौंड़ी आवाज भी साफ हो जाती है।

4.  छुहारे एक बार में 4 से अधिक नहीं खाने चाहिए वरना यह गर्म करते हैं।